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शनिवार, 07 दिसंबर, 2002 को 18:24 GMT तक के समाचार
 
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ओंकार जी को आख़िरी विदाई
 
छोटे से घर और बड़े से दिल के मालिक
छोटे से घर और बड़े से दिल के मालिक

बीबीसी के लाखों श्रोताओ के चहेते, जाने-माने लेखक, कवि और वरिष्ठ प्रसारक ओंकार नाथ श्रीवास्तव का शनिवार को लंदन में अंतिम संस्कार कर दिया गया.

पिछले महीने आंतों में गांठ की शिकायत के बाद वे कुछ समय से अस्पताल में थे.

नवंबर के अंतिम हफ़्ते में उनका ऑपरेशन हुआ था और 29 नवंबर की रात दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हो गया.

अब उनके परिवार में उनकी पत्नी कीर्ति चौधरी और बेटी अतिमा श्रीवास्तव हैं.

कीर्ति जी ख़ुद हिंदी की जानीमानी कवयित्री हैं और अतिमा अंग्रेज़ी की प्रतिष्ठित उपन्यासकार.

यूँ तो ओंकार जी काफ़ी समय से बीमार थे और हर हफ़्ते दो बार उन्हें डायलिसिस करवानी पड़ती थी.

लेकिन उनकी ज़िंदादिली पर इसका कोई असर पड़ा हो ऐसा न तो उनके साथ काम करनेवाले हम लोगों को नज़र आया और न ही हर हफ़्ते उनकी आवाज़ सुनने वालों को लगा.

उनकी तारीफ़ में आनेवाली हज़ारों चिट्ठियाँ और उनके निधन की ख़बर सुनकर आ रही श्रद्धांजलियों का ताँता इसका गवाह है.

लंबी पारी

ओंकार नाथ श्रीवास्तव 1969 में एक प्रोड्यूसर के तौर पर बीबीसी हिंदी सेवा से जुड़े थे.

वे बीबीसी हिंदी सेवा के उप प्रमुख भी रहे.

उन्होंने बीबीसी हिंदी सेवा की भाषा और शैली को गढ़ने में बहुत ही अहम भूमिका निभाई.

लंदन में ही बस चुके थे ओंकार जी
मूलरूप से वे उत्तर प्रदेश के रायबरेली ज़िले के रहने वाले थे और उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी.

बीबीसी हिंदी सेवा के श्रोताओं ने बार-बार अपने पत्रों में लिखा कि उनके प्रसारण ऐसे जीवंत होते थे मानो वे उनके कमरे में बैठकर बातें कर रहे हों.

बांग्लादेश के जन्म की दास्तान हो, या इंदिरा गाँधी की हत्या की ख़बर, ओंकारनाथ श्रीवास्तव ने श्रोताओं को वर्षों बाँधे रखा और आसान भाषा में रोचक तरीक़े से राजनीति से लेकर विज्ञान तक की गुत्थियाँ खोलीं.

वे पिछले कुछ समय से बीमार थे लेकिन चंद आख़िरी दिनों को छोड़कर वे लगातार पूरे जोश के साथ काम करते रहे.

श्रद्धांजलि

लंदन के विद्युत शवदाह गृह में शनिवार को उनकी अंत्येष्टि से पहले एक शोकसभा में उनके कुछ क़रीबी लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

प्रख्यात लेखक और ओंकार जी के क़रीबी रिश्तेदार अजित कुमार ने उनके साथ अपने पचास वर्ष से भी अधिक समय के संबंधों को याद किया.

उनका कहना था कि ओंकार जी के संपर्क में जो भी आया, उनका अभिन्न मित्र बन गया और यह संबंध उनके अंतिम समय तक क़ायम रहे

बीबीसी हिंदी सेवा के अध्यक्ष रह चुके कैलाश बुधवार ने ओंकार जी की विनोदप्रियता और सहजता का ज़िक्र किया.

ओंकार जी को श्रद्धांजलि देने वालों में विलियम क्रॉली और डॉक्टर सत्येंद्र श्रीवास्तव भी शामिल थे.

इस अवसर पर भारतेंदु विमल ने मंत्रोच्चार किया और गीता के कुछ श्लोकों का पाठ किया.

ओंकार जी की बेटी अतिमा ने एक कविता के ज़रिए अपने पिता को अपनी अंतिम श्रद्धांजलि दी.

बीबीसी हिंदी सेवा के श्रोता बड़ी तादाद में अपने पत्रों और ईमेल के ज़रिए उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

छोटा सा घर

ओंकार जी की एक कविता की कुछ पंक्तियाँ हैं

कहीं एक छोटा सा घर हो,
कोई बढ़ता हुआ गाँव या कोई पिछड़ा हुआ शहर हो,
वहीं एक छोटा सा घर हो.

ओंकार जी जहाँ रहे यह छोटा सा घर उनके साथ हमेशा रहा. और साथ में था एक बहुत बड़ा दिल.

अपने आसपास के लोगों को उन्होंने वही स्नेह दिया जो कोई अपनों को ही दे सकता है.

बीबीसी हिंदी परिवार अपने इस प्रिय सदस्य को हमेशा याद रखेगा.

 
 
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