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शनिवार, 31 मई, 2003 को 11:42 GMT तक के समाचार
अनिल बिस्वास नहीं रहे


जाने-माने संगीतकार अनिल बिस्वास का दिल्ली में निधन हो गया है.

अनिल दा के नाम से मशहूर इस महान संगीतकार ने 1930 के दशक में हिंदी फ़िल्मों में संगीत देना शुरू किया था.

वे 89 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे, उनका अंतिम संस्कार रविवार को होगा.

मुकेश और तलत महमूद जैसे गायकों को पहला मौक़ा देने वाले अनिल दा को एक हँसमुख और मिलनसार व्यक्ति के रूप में भी लोग याद रखेंगे.

'दिल जलता है तो जलने दे...' से मुकेश ने अपने करियर की शुरूआत की और उसके बाद अनेक हिट गाने गए.

अनिल बिस्वास को हिंदी फ़िल्म संगीत में पहली बार ऑर्केस्ट्रा का इस्तेमाल करने का श्रेय भी दिया जाता है.

1949 में उन्होंने तलत महमूद से आरज़ू फ़िल्म में पहली बार गाना गवाया जो सुपरहिट रहा--'ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल....'

अनिल बिस्वास का जन्म पूर्वी बंगाल में 1914 में हुआ था जो आज बांग्लादेश है.

वे स्वतंत्रता संग्राम में भी शामिल हुए और बंगाल के महान कवि और संगीतकार काज़ी नज़रूल इस्लाम के भी संपर्क में रहे.

वे काफ़ी कम उम्र में कोलकाता चले आए और उसके बाद वहाँ से 1934 में मुंबई चले गए.

मुंबई पहुँचते ही उन्हें 'धर्म की देवी' नाम की फ़िल्म में संगीत देने का अवसर मिला और उसके बाद यह सिलसिला बरसों तक चलता रहा.
 
 
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