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सोमवार, 09 जून, 2003 को 23:27 GMT तक के समाचार
अचला शर्मा को सम्मान
सूरीनाम के उपराष्ट्रपति ने दिया सम्मान
सूरीनाम के उपराष्ट्रपति ने दिया सम्मान

सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो में सातवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन हिंदी को संयुक्त राष्ट्र में मान्यता दिलाने के लिए काम करने की प्रतिबद्धता के साथ ख़त्म हो गया.

सोमवार को समापन समारोह में बीबीसी हिंदी की अध्यक्ष अचला शर्मा सहित हिंदी के 25 विद्वानों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया.

चार दिन तक चले सम्मेलन के आख़िरी दिन छह प्रस्ताव पास किए गए. इनमें विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी की पढ़ाई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हिंदी के प्रचार प्रसार की भी बातें शामिल हैं.

सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधि इस बात पर सहमत थे कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए शैक्षिक संस्थाओं के बीच समन्वय की ज़रूरत है.

प्रस्ताव में इसका भी जिक्र किया गया.

सम्मेलन में यह प्रस्ताव भी पारित हुआ कि दुनिया भर में जहाँ भी भारतीय मूल के लोग हैं, उनमें हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए और हिंदी के विद्वानों की एक डायरेक्टरी बनाई जाए.

भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए प्रतिनिधियों को संबोधित किया.

उन्होंने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की ज़रूरत पर बल दिया.

सम्मानित

इस सम्मेलन में क़रीब 30 देशों के 400 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

प्रस्ताव में कहा गया कि हिंदी, उसका साहित्य और इससे फलने-फूलने वाली सांस्कृतिक परंपरा दुनिया की धरोहरों में शामिल है.

यह भाषा 100 से ज़्यादा देशों में बोली जाती है. प्रस्ताव में भारत सरकार से अपील की गई कि वह हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा का दर्जा दिलाने की कोशिश तेज़ करे.

समापन समारोह में सूरीनाम के उपराष्ट्रपति ने बीबीसी हिंदी की अध्यक्ष अचला शर्मा सहित हिंदी के 25 विद्वानों को सम्मानित किया.

इनमें शामिल हैं- वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी, कवि कुंवर नारायण और रामदेव धुरंधर. विदेश में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए प्रोफेसर तोशियो तनाका और डॉक्टर लोथार लुत्से को सम्मानित किया गया.

इनके साथ-साथ हिंदी की उपन्यासकार मृदुला गर्ग, पत्रकार वेद प्रताप वैदिक, दयाकृष्ण, विजय वर्मा, धर्मपाल मैनी, शंकर लाल पुरोहित, डॉक्टर एनवी राजगोपाल, पी संजीवैया और प्रोफेसर तंकामणि अम्मा को भी सम्मानित किया गया.
 
 
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