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गुरुवार, 28 अगस्त, 2003 को 16:33 GMT तक के समाचार
मुलायम सिंह यादवः चतुर खिलाड़ी
मुलायम सिंह यादव को वामपंथी पार्टियों का समर्थन मिल रहा है
मुलायम सिंह यादव को वामपंथी पार्टियों का समर्थन मिल रहा है

समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव अपने चार दशक के राजनीतिक करियर के दौरान काँग्रेस विरोधी अभियान के प्रतीक रहे हैं.

लेकिन ऐसा तीसरी बार हुआ है कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने के लिए उसी काँग्रेस का दामन पकड़ना पड़ा है.


पहली बार मुलायम मायावती के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे
पाँच साल पहले मुलायम सिंह यादव ही काँग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री बनने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हुए थे.

उन्होंने उनके इटली मूल के होने का मुद्दा उठाकर मामले को नया रंग दे दिया था.

फरवरी 2002 में जब उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद समाजवादी पार्टी को सत्ता नहीं नसीब हुई, तो उसके पीछे काँग्रेस की उसे समर्थन न देने की ही जिद थी.

क्योंकि काँग्रेस को मुलायम सिंह का वह पैंतरा भूला नहीं था, जिसके कारण सोनिया गाँधी को सत्ता से वंचित रहना पड़ा था.

लेकिन तब से भारतीय राजनीति में काफी पानी बह गया है.

नए गठबंधन बने हैं, नए मोर्चे बने हैं और काँग्रेस और समाजवादी पार्टी के रिश्तों में भी नरमी आई है.

काँग्रेस ने भी पहले श्रीनगर और फिर हिमाचल प्रदेश में अपने सम्मेलन के दौरान गठबंधन की बात स्वीकार की.

और अब उसका नतीजा सामने है.

काँग्रेस ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में नए सरकार को समर्थन देने का फ़ैसला किया है.

1995 में मुलायम सिंह यादव को बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती के कारण सत्ता गँवानी पड़ी थी.

आठ साल बाद एक बार फिर मुलायम सिंह मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने जा रहे हैं.

इन आठ सालों में मुलायम सिंह ने उत्तर प्रदेश की जगह राष्ट्रीय राजनीति में अपने को स्थापित करने की कोशिश की है.

उन्होंने इस दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री का पद भी संभाला. इस समय भी वे लोकसभा से सांसद हैं.

राजनीतिक जीवन

मुलायम सिंह का जन्म 22 नवंबर 1939 को एक मध्यवर्गीय यादव परिवार में हुआ था.


पिछले चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी
उन्होंने अपना करियर एक शिक्षक के रूप में शुरू किया था.

इसी दौरान उनका संपर्क मशहूर समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया से हुआ.

1967 में वे पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए, जिस समय उत्तर प्रदेश में पहली बार ग़ैर-काँग्रेसी सरकार का गठन हुआ था.

1977 में वे पहली बार मंत्री बने और 1989 में मुख्यमंत्री.

मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान मुलायम सिंह यादव धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में उभरे.

उस समय भारतीय जनता पार्टी अयोध्या में मंदिर बनाने के लिए अपना आंदोलन तेज़ कर रही थी.

1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुलायम सिंह ने बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती के साथ गठबंधन करने का फैसला किया.

दूसरी बार वे बहुजन समाज पार्टी के सहयोग से 1993 में मुख्यमंत्री बने.

लेकिन यह गठबंधन ज़्यादा नहीं चल पाया और जून 1995 में मायावती ने उनसे समर्थन वापस ले लिया.

मायावती खुद भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से मुख्यमंत्री बन बैठीं.

मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी फरवरी 2002 में उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई.

लेकिन उन्हें बहुमत नहीं मिल पाया और काँग्रेस ने उन्हें समर्थन देने से भी मना कर दिया.

चुनौती

मुलायम सिंह यादव की पिछड़े वर्ग और मुसलमानों में गहरी पैठ है.

मायावती के हाल के डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान मुलायम सिंह ने सवर्ण जातियों के साथ हो रहे अन्याय का मुद्दा भी ज़ोर-शोर से उठाया.


कहा जाता है कि इस बार भाजपा नेताओं ने भी मुलायम की राह आसान की
इस कारण अगड़ी जातियों में भी उनका जनाधार बढ़ा है.

मुलायम सिंह यादव भारतीय जनता पार्टी के बड़े विरोधी रहे हैं और पार्टी को सांप्रदायिक भी कहते हैं.

लेकिन इस बार माना जा रहा है कि सरकार बनाने के लिए परदे के पीछे की राजनीति में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का भी गुप्त समर्थन मिला है.

क्योंकि भाजपा के ज़्यादातर विधायक ज़ल्दी चुनाव के पक्ष में नहीं हैं.

इस बार मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में मुलायम सिंह के सामने कड़ी चुनौती होगी.

भारतीय जनता पार्टी का भी उत्तर प्रदेश में बड़ा दाँव है.

क्योंकि ज़ल्द ही लोकसभा चुनाव आने वाले हैं और उत्तर प्रदेश लोकसभा में सबसे ज़्यादा सदस्य भेजता है.

403 सदस्यों वाली विधानसभा में समाजवादी पार्टी के सिर्फ़ 142 विधायक हैं.

मुलायम सिंह को बाक़ी के विधायकों का समर्थन बनाए रखना अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती होगी.
 
 
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