दक्षिण एशिया में भुखमरी गंभीर

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक आर्थिक संकट के कारण दक्षिण एशियाई देशों में भुखमरी पिछले चार दशक में अपने चरम पर पहुँच गई है.

Image caption भारत-पाकिस्तान से रक्षा बजट में कटौती कर, जनता की भलाई पर पैसा लगाने को कहा गया

संयुक्त राष्ट्र की बच्चे को कल्याण के लिए संस्था यूनीसेफ़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक संकट के कारण खाद्य पदार्थों और तेल के दाम बढ़े हैं जिसका असर दक्षिण एशिया पर बुरी तरह पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार दो साल पहले की तुलना में दक्षिण एशिया में अब क़रीब दस करोड़ अधिक लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं. संगठन का कहना है कि दक्षिण एशिया की सरकारों को इस चुनौती से निपटने के लिए तत्काल क़दम उठाने चाहिए. यूनिसेफ़ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि दक्षिण एशिया संकट के मुहाने पर खड़ा है बढ़ते आर्थिक संकट का असर ग़रीबों पर पड़ा है.

'ज़्यादा ख़र्च भोजन पर ही'

इस क्षेत्र के ग़रीब लोग अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा भोजन पर ख़र्च करते हैं और अन्य चीज़ों - मसलन शिक्षा और स्वास्थ्य पर पैसे खर्च नहीं कर पाते हैं. ऐसे में जब खाद्य पदार्थों की क़ीमतें बढ़ी हैं तो उनकी दिक्कतें भी बढ़ गई हैं.

Image caption दक्षिण एशिया की तीन-चौथाई आबादी प्रति दिन दो डॉलर से कम में ग़ुज़ारा करती है

संगठन के अनुमान के अनुसार दक्षिण एशिया की तीन चौथाई से अधिक आबादी प्रति दिन दो डॉलर से भी कम पर गुज़ारा करती है और महिलाओं और बच्चों की स्थिति सबसे ख़राब है. बढ़ते आर्थिक संकट से सबसे बुरी तरह प्रभावित दक्षिण एशियाई देशों में नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान का नाम है लेकिन आर्थिक शक्ति के रुप में उभरा भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है जहां बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर कम हुए हैं. यूनीसेफ कहता है कि इन देशों की सरकारों को खाद्य पदार्थ, स्वास्थ्य और शिक्षा पर अधिक से अधिक खर्च करने की ज़रुरत है ताकि इस संकट से निपटा जा सके लेकिन आर्थिक मंदी के कारण सरकारों के पास भी पैसे की कमी मानी जा रही है. संगठन ने दो बड़े देशों - भारत और पाकिस्तान से अपने रक्षा बजट में कटौती करने की भी मांग की ताकि ये पैसा लोगों की भलाई के लिए लगाया जा सके.