देश से बाहर सरकार बनाएगा एलटीटीई

पथमानाथन
Image caption पथमानाथन ने अज्ञात जगह से बयान जारी किया है

श्रीलंका के तमिल विद्रोहियों का कहना है कि वे पहली बार देश के बाहर सरकार बनाने जा रहे हैं जो श्रीलंका के तमिल अल्पसंख्यकों के लिए काम करेगी.

ये घोषणा एलटीटीई के एक वरिष्ठ अधिकारी सेल्वरसा पथमानाथन ने थी. पथमानाथन उन चंद विद्रोही नेताओं में से हैं जो अब भी जीवित हैं और एलटीटीई के अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रमुख हैं. पिछले महीने श्रीलंका सेना के साथ संघर्ष में एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण मारे गए थे और श्रीलंका की सेना ने एलटीटीई के ख़िलाफ़ संघर्ष में जीत की घोषणा की थी. कोलंबो से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड का कहना है कि श्रीलंका सरकार की इस घोषणा के बाद से विदेशों में रहने वाले एलटीटीई समर्थक भ्रम की स्थिति में थे और साथ ही अपमानित महसूस कर रहे थे.

घोषणा

एक अज्ञात स्थान से जारी एक बयान में पथमानाथन ने एक अलग तमिल राष्ट्र के गठन संबंधी योजना का ऐलान किया जिसमें कहा गया कि तमिलों की इच्छा एक ऐसे देश की है, जहाँ उनका ख़ुद का शासन हो.

बयान में पथमानाथन ने कहा है- स्वशासन के लिए तमिलों का संघर्ष एक नए चरण में पहुँच गया है. अब समय आ गया है कि हम राजनीतिक उद्देश्य के साथ अपनी आज़ादी के लिए आगे बढ़ें. लेकिन साथ ही हमें अपनी जन्मभूमि की वास्तविकताओं को ध्यान में रखना होगा. पिछले महीने ही पथमानाथन ने स्वीकार किया था कि एलटीटीई के नेता प्रभाकरण की मौत हो चुकी है औऱ एलटीटीई ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ पथमानाथन के ताज़ा बयान से ऐसा लगता है कि एलटीटीई ने अलगाववादी रवैया नहीं छोड़ा है.

संघर्ष

अपने बयान में पथमानाथन ने आगे कहा है कि उनकी नई सरकार संघर्ष के अगले चरण को जारी रखेगी. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पथमानाथन का ये बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय और श्रीलंका की सरकार को पसंद नहीं आएगा जो अब भी एलटीटीई पर अपनी जीत का जश्न मना रही है. हाल ही में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्होंने अपने शब्दकोश से अल्पसंख्यक शब्द हटा लिया है. श्रीलंका सरकार के एक मंत्री ये कह चुके हैं कि अगर कोई व्यक्ति एलटीटीई के विचारों का समर्थन करेगा तो इसे कानून का उल्लंघन समझा जाएगा.

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