भारत-पाक संबंधों के जाल में फँसे मछुआरे

मछुआरे
Image caption भारत और पाकिस्तान के ख़राब संबंधों का भुगतान मुछआरों को भुगतना पड़ रहा है

पिछले साल मुंबई हमलों ने एक तरफ़ भारत और पाकिस्तान के संबंधों को प्रभावित किया है तो दूसरी ओर दोनों देशों के मछुआरों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं. हमलों के बाद जलसीमा का उल्लंघन करने के आरोप में मछुआरों की गिरफ्तारियाँ बढ़ गई हैं और पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने भी उनके रोज़गार को काफ़ी कठिन बना दिया है. ज़िला ठटा के तालुक़ा खारोछान में स्थित मछुआरों का एक गाँव हैं. समुद्र के तट पर स्थित इस गाँव में लकड़ी से बने मछुआरों के करीब सात सौ घर हैं. दक्षिण में समुद्र और पश्चिम में विशाल सिंधु नदी है. यह गाँव विवादास्पद भारतीय सीमा यानी सर क्रीक से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर है और इस गाँव के मछुआरे हमेशा गिरफ्तारियों का शिकार होते हैं.

छिन गया रोज़गार

50 वर्षीय अब्दुल ग़नी वह बद-किस्मत बाप हैं जिनके तीन बेटों को इसी साल की शुरुआत में भारतीय जलसीमा का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. उनके तीनों बेटों के साथ उनकी नौका भी कब्ज़े में ले ली गई जो रोज़गार का एक मात्र साधन थी. अब्दुल ग़नी के लिए अब घर का खर्चा चलाना काफ़ी मुश्किल हो गया है. उन्होंने बताया, "गाँव वालों से कभी भीख मांगता हूँ, कभी थोड़ी बहुत मज़दूरी कर लेता हूँ. अब बूढ़ा हो गया हूँ ज़्यादा मज़दूरी भी नहीं होती." उन्होंने कहा, "अब कमाने वाला कोई नहीं है, तीनों बेटों को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया है." इस गाँव के करीब हर घर के दो-तीन आदमी भारतीय जेलों में क़ैद हैं. 25 वर्षीय मोहम्मद भी उन मछुआरों में शामिल हैं. उन्होंने बताया, "मेरे तीन भाई हैं और सात महीनों से पता नहीं है कि वह कहाँ हैं." वे कहती हैं, "स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि वह भारत की जेल में क़ैद हैं, मेरे भाईयों के छोटे छोटे बच्चे हैं और वे अपने पिता को याद करते हैं."

तनाव का असर

मछुआरों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था फिशर फोक फोरम के सदस्य सामी मेमन ने बताया कि इस ज़िले के तीन गाँवों में मछुआरों को मछली पकड़ने में काफी दिक्कतें हो रहीं क्योंकि यह भारतीय सीमा के करीब हैं. उन्होंने बताया, "मछुआरों के पास रोज़गार की कोई सुविधा नहीं है, जब वे मछली पकड़ने जाते हैं तो उन्हें जल सीमा का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है." सामी के अनुसार गिरफ्तार होने वाले मछुआरों के परिजन बड़ी बुरी स्थिति में जीवन बिता रहे हैं और सरकार भी उन लोगों की मदद नहीं करती है. ध्यान रहे कि पाकिस्तान की जेलों में 450 भारतीय मछुआरे क़ैद हैं जबकि भारत में 150 पाकिस्तानी मछुआरे बंद हैं. सामी मेमन ने बताया कि मुंबई हमलों के बाद इस इलाके में सुरक्षा स्थिति काफ़ी गंभीर हो गई है और इसे लेकर मछुआरों में काफ़ी डर है. किसी देश के लिए सुरक्षा बहुत ज़रूरी है लेकिन दोनों देशों को चाहिए कि सुरक्षा के साथ साथ वह अपने नागरिकों के लिए ऐसे प्रबंध करे जिससे उनका रोज़गार प्रभावित न हो. मछुआरों ने मांग की है कि दोनों देशों की जेलों में कैद मुछवारों के तुरंत रिहा किया जाए.

संबंधित समाचार