प्रतिबंधित संगठनों का नया अड्डा

लश्कर के कार्यकर्ता
Image caption पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जमात ने ज़मीन किराये पर ली है

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन फिर से सक्रिय हो रहे हैं.

पुलिस की एक ख़ुफ़िया रिपोर्ट में सरकार को सचेत किया गया है कि प्रतिबंधित संगठन पिछले कुछ महीनों में एक बार फिर इस इलाक़े में सक्रिय हो गए हैं. इस्लामाबाद में बीबीसी को मिली एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात-उद-दावा ने इसी साल मार्च में मुज़फ़्फ़राबाद के क़रीब दोलाई नामक स्थान पर एक स्थानीय व्यक्ति 65 कनाल ज़मीन पाँच साल के लिए किराये पर ली है. यहाँ वे अपना मुख्यालय स्थापित कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संगठन ने वहाँ कई अस्थायी मकान, एक मस्जिद, एक स्कूल और एक डिस्पेंसरी बना ली है. इनके अलावा वहाँ और भी निर्माण कार्य चल रहा है. भारत ने पिछले साल मुंबई में हुए हमलों का आरोप लश्कर-ए-तैबा पर लगाया था.

पाबंदी

इस हमले में बच जाने वाले आमिर अजमल क़साब भारतीय पुलिस की हिरासत में है. भारतीय पुलिस उसे हमलावरों में से एक मानती है. संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने जमात-उद-दावा पर पाबंदी लगाते हुए उसके कई दफ़्तरों को बंद कर किया था. जमात-उद-दावा प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को मुंबई हमले के बाद नज़रबंद किया गया था. लेकिन पिछले दिनों अदालत के आदेश के बाद उनकी नज़रबंदी ख़त्म कर दी गई. संयुक्त राष्ट्र की ओर से जमात-उद-दावा पर पाबंदी लगाए जाने के कुछ दिन पहले पाकिस्तान की सेना ने मुज़फ़्फ़राबाद के पास शेवाई नाला के पास कथित रूप से लश्कर-ए-तैबा के एक केंद्र पर कार्रवाई की थी और उसे अपने क़ब्ज़े में ले लिया था.

Image caption ज़की-उर-रहमान लखवी को गिरफ़्तार किया गया था

प्रतिबंधित संगठन लश्कर के ऑपरेशन चीफ़ ज़की-उर-रहमान लखवी इस कार्रवाई के दौरान गिरफ़्तार किए गए थे. भारत लखवी को मुंबई हमले का प्रमुख साज़िशकर्ता मानता है.

सक्रिय

पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैबा के ख़िलाफ़ कार्रवाई के नतीजे में इन संगठनों के कार्यकर्ता भूमिगत हो गए थे. लेकिन पिछले कुछ महीनों से वे दोबारा सक्रिय हो गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात-उद-दावा के कार्यकर्ता अपने दफ़्तरों और निवास स्थानों को दोलाई के उस इलाक़े में ले जा रहे हैं, जहाँ संगठन ने ज़मीन किराए पर ली है. पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दूसरे प्रतिबंधित जिहादी संगठनों की गतिविधियों के बारे में भी ज़िक्र किया है. ख़ुफ़िया रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रतिबंधित संगठन हरकतुल मुजाहिदीन ने मुज़फ़्फ़राबाद के पास मीरा तनोलियां में अपने दफ़्तर के अलावा एक मदरसा भी स्थापित किया है.

गतिविधियाँ

इसी तरह रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रतिबंधित संगठन जैशे मोहम्मद ने भी मुज़फ़्फ़राबाद के क़रीब शेवाई नाला में दफ़्तर के साथ-साथ एक मदरसा स्थापित कर रखा है. जबकि इसी जगह प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैबा ने भी एक मदरसा स्थापित किया है. जैशे मोहम्मद और लश्करे तैबा पर भारतीय संसद पर हमला करने का आरोप है. वर्ष 2002 में भारतीय संसद पर हमले के बाद पाकिस्तान सरकार ने इन दोनों संगठनों पर पाबंदी लगा दी थी. जैशे मोहम्मद पर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर हमला करने के साथ-साथ अमरीकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या का भी आरोप है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों को इन प्रतिबंधित संगठनों के मदरसे में जाने की अनुमति नहीं है और न ही ये संगठन मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों के बारे में कुछ जानकारी देती है. रिपोर्ट में ये आशंका जताई गई है कि हो सकता है कि ये संगठन मदरसों की आड़ में जिहादी गतिविधियाँ चला रहे हों.

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