'अमरीका से मध्यस्थता के लिए नहीं कहा'

  • 18 जुलाई 2009
गिलानी और मनमोहन सिंह
Image caption दोनों पक्षों के बीच मिस्र में अहम बातचीत हुई है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने शनिवार को कहा है कि भारत के साथ जिन मुद्दों पर बातचीत की सहमति बनी है उसमें किसी भी तीसरे पक्ष की खुशी या नाराज़गी को ध्यान देकर चलने का कोई तुक ही नहीं बनता है.

उन्होंने कहा कि भारत के साथ संबंधों को सुधारने के क्रम में अमरीका या किसी और पक्ष से मध्यस्थता की बात करने की ज़रूरत नहीं है. ताज़ा प्रयासों के पीछे दोनों पक्षों के नेताओं की आपसी सहमति है और इसी के साथ आगे बढ़ा जाएगा.

मिस्र से निर्गुट देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद पाकिस्तान लौटे गिलानी शनिवार को अपने देश की मीडिया से रूबरू थे. पत्रकारों से बातचीत के दौरान मिस्र में उनकी भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात और दोनों पक्षों की ओर से जारी संयुक्त बयान ही प्रमुखता से छाए रहे.

एक पत्रकार ने शनिवार को प्रधानमंत्री गिलानी से सवाल किया कि संयुक्त बयान में आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई को बाहर रखकर बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने की बात से भारत के प्रधानमंत्री अपने संसद में पीछे हट गए और अब अमरीकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन भी भारत की पाँच दिन की यात्रा पर हैं, ऐसे में क्या पाकिस्तान अमरीका से कहेगा कि वो भारत को फिर से पटरी पर लाने के लिए कहे.

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मैंने कभी भी अमरीका से मध्यस्थता करने के लिए अनुरोध नहीं किया और न ही अब करूंगा. किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की ज़रूरत हमें नहीं है. ये हमारा अपना प्रयास है और हम इस दिशा में आगे बढ़ने पर परस्पर सहमत हैं."

उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान, दोनों ही देशों के साथ एक जो चीज़ समान है, वो यह है कि दोनों ही देश आतंकवाद की चुनौती से जूझ रहे हैं, इसके शिकार है. इसलिए इस दिशा में आगे बढ़ना और डेढ़ अरब लोगों के हिसों को ध्यान में रखकर आगे चलना हमारी ज़रूरत है जिससे पीछे नहीं हटा जा सकता है.

मुंबई का सवाल

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से सवाल मुंबई पर भी हुए और बलूचिस्तान पर भी. पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई पर जिस भी स्तर पर मदद करने की ज़रूरत पड़ेगी, पाकिस्तान सरकार उसके लिए तैयार है. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अगर कोई ऐसा सबूत देता है जो कि विश्वास योग्य हो तो पाकिस्तान मदद करेगा.

उन्होंने कहा, "हम जो भी कर रहे हैं, अपने हित में कर रहे हैं. हम कोई भी क़दम किसी के कहने पर नहीं उठा रहे. कोई भी क़दम इसलिए नहीं उठाया जा रहा कि इससे कौन खुश होगा और कौन नाराज़, यह हमारी ज़रूरत है."

पर साथ ही बलूचिस्तान में अस्थिरता फैलाने के पीछे कथित रूप से भारतीय खुफ़िया एजेंसी, रॉ के हाथ होने के सवाल पर भी गिलानी बोले, थोड़ा संभलते हुए.

उन्होंने साफ़ किया कि इस बाबत जो भी जानकारी पाकिस्तान के पास है, सही समय आने पर भारत सरकार को सौंपी जाएगी. उन्होंने बताया कि बलूचिस्तान वाले मुद्दे पर कुछ बातें भारतीय प्रधानमंत्री को बताई गई हैं और उनकी ओर से मदद का आश्वासन भी मिला है.

उन्होंने यह भी बताया कि बलूचिस्तान मामले में शक की सुई अफ़ग़ानिस्तान की ओर भी है और इस सिलसिले में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति सहित कई स्तर पर जानकारी दे दी गई है.

बातचीत के दौरान जहाँ गिलानी पाकिस्तानी मीडिया के सवालों के लिए संतोषजनक जवाब देने की कोशिश करते नज़र आए वहीं भारत और आसपास के अन्य सवालों पर बहुत संभलकर बोलते दिखे. उनकी कोशिश लगातार यह रही कि मिस्र में जारी संयुक्त बयान से ज़्यादा इधर-उधर भड़के बग़ैर अपनी बात कह दी जाए.

उन्होंने यह भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली बहुत ज़रूरी है क्योंकि वहाँ शांति बहाली होती है तो इसका फायदा पाकिस्तान को भी होगा. गिलानी बातचीत के दौरान चरमपंथ, आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ाई से बोलते रहे और उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के नेता भी राजनीतिक स्तर पर इस बात से सहमत हैं कि चरमपंथ का ख़ात्मा हो क्योंकि इससे क़ानून-व्यवस्था तो प्रभावित होती ही है, आर्थिक विकास भी प्रतिकूल असर देखता है.

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