'भारत से तुलना नहीं करें'

मनमोहन सिंह और यूसुफ़ रज़ा गिलानी
Image caption मुंबई पर हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान केसंबंधों में कड़वाहट आ गई है

मज़बूत होते भारत-अमरीका के संबंधों पर एक अमरीकी थिंक टैंक का मानना है कि भारत-अमरीका रिश्तों का जो स्तर है वह पाकिस्तान-अमरीका संबंधों से कहीं आगे बढ़कर, अलग श्रेणी में है.

थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल ऑफ़ अमेरीका में दक्षिण एशिया सेंटर के निर्देशक शुजा नवाज़ ने बीबीसी के साथ एक बातचीत में कहा है कि भारत के अमरीका के क़रीब आने की वजह भारत की दुनिया में बढ़ती हैसियत है और इस मामले में वह पाकिस्तान से काफ़ी अलग है.

सोमवार को भारत और अमरीका के बीच रक्षा, परमाणु सहयोग और अंतरिक्ष कार्यक्रम के क्षेत्रों में हुए समझौतों के बाद उन्होंने ये टिप्पणी की है.

शुजा नवाज़ का कहना है कि पाकिस्तान ने जब भी किसी भी मुद्दे पर अमरीका को मदद दी, तो उसके बदले में अच्छी क़ीमत भी वसूल ली. इससे पाकिस्तान और अमरीका के संबंध उस स्तर के नहीं बन पाए जैसे अमरीका और भारत के बने.

उनका कहना है कि अब जबकि भारत जी-8 के सम्मेलन का भी हिस्सेदार बन चुका है तो ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी हैसियत बढ़ी है.

'पाक, अफ़ग़ानिस्तान का ज़िक्र नहीं'

शुजा नवाज़ का कहना है कि न सिर्फ़ अमरीका और भारत बहुत क़रीब आएं हैं बल्कि दोनों देशों ने जो साझा बयान जारी किया, उसमें पाकिस्तान और अफ़गा़निस्तान के स्थानीय मुद्दों की बात ही नहीं की गई है.

उनका मानना है कि यह इस बात को दर्शाता है कि अमरीका ने भारत और पाकिस्तान की स्थानीय समस्याओं को बिल्कुल अलग-अलग कर दिया है.

शुजा नवाज़ का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अमरीका से समझौते करना चाहिए और इस बारे में पाकिस्तान की जनता को भी सोचना होगा.

उनका कहना है कि अमरीका भारत के साथ कैसे समझौते कर रहा है, इस पर पाकिस्तान को ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है.

उनका कहना है कि अगर पाकिस्तान अमरीका से अच्छे संबंध चाहता है तो सबसे पहले उसे अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी करनी चाहिए और साथ ही राजनीतिक स्थिति को सुधारने चाहिए.

शुजा नवाज मानते हैं कि पाकिस्तान को ये सोचने की आवश्यकता है कि वह भारत से किस क्षेत्र में समझौते कर सकता है. उनका कहना है कि व्यापारिक समझौते करने से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव घटेगा और रक्षा बजट कम होगा.

उनका मानना है कि पाकिस्तान को भारत से मुक़ाबला करने की जगह अपना रुख़ बदलने पर ध्यान देना चाहिए और साथ ही उसे मध्य एशिया के देशों के साथ भी अच्छे संबंध बनाने चाहिए.

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