नैटो की अल क़ायदा के बारे चेतावनी

नैटो
Image caption अगस्त में अफ़ग़ानिस्तान के चुनावों से पहले नैटो सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई है

नैटो के महासचिव याप ड हूप सकैफ़र ने चेतावनी दी है कि यदि अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाएँ अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकल गईं तो अल क़ायदा को वहाँ अपनी गतिविधियों के लिए खुली छूट मिल जाएगी.

उत्तर एटलांटिक सहयोग संगठन (नैटो) के महासचिव ने ये चेतावनी अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान दी है.

उनका कहना था कि गठबंधन सेनाएँ अफ़ग़ानिस्तान से वापसी की बात नहीं सोच सकतीं फिर वहाँ मौजूद रहना चाहे कितना ही ख़तरनाक या महँगा क्यों न हो.

55 सैनिक मारे गए

नैटो के महासचिव याप ड हूप सकैफ़र ने कहा, "यदि हम अफ़ग़ानिस्तान से बाहर चले जाते हैं तो वहाँ तालेबान का कब्ज़ा हो जाएगा. लोगों, विशेष तौर पर महिलाओं के लिए इसका ख़तरनाक परिणाम होगा. पाकिस्तान को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ेगा और इसका असर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा. मध्य एशिया में कट्टरपंथ फैलेगा. अल क़ायदा को अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फिर खुली छूट मिल जाएगी और उसके आतंकवादी लक्ष्य तो विश्व स्तर के हैं."

ग़ौरतलब है कि उनका बयान ऐसे समय आया है जब इस वर्ष का जुलाई महीना गठबंधन सेनाओं के लिए वर्ष 2001 में शुरु हुए अफ़ग़ान युद्ध के बाद से सबसे ख़तरनाक सिद्ध हुआ है.

सोमवार को एक बम धमाके में चार अमरीकी सैनिक मारे गए थे और इसी के साथ जुलाई के महीने में अफ़ग़ानिस्तान में मारे जाने वाले अमरीकी सैनिकों की संख्या 55 हो गई है. इनमें से 16 ब्रितानी थे.

इस साल अगस्त में होने वाले अफ़ग़ानिस्तान के चुनावों से पहले वहाँ तालेबान के ख़िलाफ़ सैनिकों के संख्या बढ़ा दी गई है लेकिन हिंसक घटनाएँ बढ़ती ही जा रही हैं.

महत्वपूर्ण है कि जुलाई माह में 16 ब्रितानी सैनिकों के मारे जाने के बाद ब्रिटेन में इस बहस ने ज़ोर पकड़ा है कि क्या वहाँ तैनात ब्रितानी सैनिकों के पास इधर-उधर पड़े बमों से निपटने के लिए पर्याप्त असला-बारूद है या नहीं.