'नरमपंथी तालेबान से बात हो'

तालेबान (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption अमरीका और ब्रिटेन का मानना है कि नरमपंथी तालेबान नेताओं से बातचीत की जा सकती है

अमरीका और ब्रिटेन के उच्च अधिकारियों ने कहा है कि तालेबान के वो लड़ाके जो कट्टरवाद के ख़िलाफ़ हैं, उन्हें अफ़ग़ानिस्तान की राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए.

रिचर्ड हॉलब्रुक ने बीबीसी को बताया कि ऐसे लोगों को समाज का हिस्सा बनाए जाने की अनदेखी हुई है.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलीबैंड का कहना है कि तालेबान से जुड़े नरमवादी लोगों को बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए.

दक्षिण अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटेन के नेतृत्व में पहले चरण का अभियान ख़त्म हुआ है. ये बयान इसी के बाद आया है.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि नैटो का ध्यान अब इस बात पर रहेगा कि हेलमंद प्रांत में हासिल किए गए इलाक़े पर नियंत्रण बनाए रखा जाए. वहाँ अगस्त में राष्ट्रपति पद का चुनाव होना है.

ये अभियान जून में शुरु किया गया था और इसमें तीन हज़ार सैनिक शामिल थे. इस अभियान में कई सैनिकों की मौत हो चुकी है.

सोमवार को हेलमंद में दो और ब्रितानी सैनिकों की मौत हो गई.

अमरीकी मरीन ने भी हेलमंद में ऑपरेश्न खंजर नाम से जुलाई में अलग अभियान चालू किया है.

'राजनीति में शामिल हों'

रिचर्ड हॉलब्रुक ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "तालेबान दवाब में है. उन्हें पैसा नहीं मिल पा रहा है. अफ़ग़ान समाज में उन लोगों के लिए जगह है जो तालेबान से लड़ रहे हैं और अल क़ायदा और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ हैं, ऐसे लोग राजनीतिक जीवन का हिस्सा बन सकते हैं."

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में सभी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार इस बात से सहमत हैं.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने भी ब्रसेल्स में कहा है कि अफ़ग़ान सरकार को ऐसे क़दम उठाने होंगे ताकि ऐसे लोगों के सामने अन्य विकल्प भी हों.

उन्होंने कहा कि कट्टरवादी रुख़ वाले लोगों और राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने के इच्छुक लोगों के बीच फ़र्क करना होगा.

डेविड मिलीबैंड ने कहा, " इसका मतलब है कि पूर्व विद्रोही अपने घर लौट सकें और अपने खेतों में काम कर सकें. उन्हें सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी दी जा सकती है."

अफ़ग़ानिस्तान में 20 अगस्त को नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव होगा. डेविड मिलीबैंड और रिचर्ड हॉलब्रुक दोनों ने कहा है कि नई सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देना होगा.

इस बीच अफ़ग़ान सरकार ने कहा है कि तालेबान इस बात पर राज़ी हो गया है कि बदघिस इलाक़े में संघर्षविराम रहे ताकि वहाँ चुनाव हो सके. लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक तालेबान ने इस समझौते से इनकार किया है.

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