मनमोहन के बयान का स्वागत

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का स्वागत करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत ही एकमात्र रास्ता है.

Image caption साझा बयान पर भारत सरकार को कई स्तर पर सफ़ाई देनी पड़ी है

मनमोहन सिंह ने गत 16 जुलाई को मिस्र के शर्म-अल-शेख़ में जारी भारत-पाकिस्तान साझा बयान पर उपजे विवादों का बुधवार को संसद में जवाब दिया था.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि मनमोहन सिंह ने 'शांति के प्रति जो भावनाएँ' प्रदर्शित की हैं, उसका वे स्वागत करते हैं.

उन्होंने कहा कि शर्म-अल-शेख़ में गुट निरपेक्ष देशों के सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच सार्थक बातचीत हुई थी.

उनका कहना था, "हम इस बात पर सहमत हुए थे कि आतंकवाद से हम दोनों को ख़तरा है और बातचीत ही एकमात्र रास्ता है."

युसूफ़ रज़ा गिलानी के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है, "प्रधानमंत्री (गिलानी) ने शांति, दक्षिण एशिया की प्रगति और राजनीतिक बड़प्पन के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ़ की है."

विवाद

उल्लेखनीय है कि शर्म-अल-शेख़ में जारी साझा बयान को लेकर भारत में विवाद पैदा हो गया था. इसके अलावा यूपीए सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पार्टी में भी अपनी सरकार के रुख़ से मतभेद उभर आए थे.

भारत में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि आतंकवाद और बातचीत को अलग-अलग करके ग़लत किया गया है. विपक्षी दलों को बयान में बलूचिस्तान का ज़िक्र आने पर भी आपत्ति थी.

लेकिन मनमोहन सिंह ने संसद में इन आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा कि आतंकवाद पर भारत का रुख़ नरम नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत को 'परखने और विश्वास करने के' सिद्धांत पर आगे बढ़ना होगा क्योंकि आज की परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच बातचीत ही एकमात्र रास्ता है.

पाकिस्तान के साथ संबंधों पर भारत सरकार के पक्ष को रखते हुए उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ता है तो कई क्षेत्रों में दोनों देशों को इसका लाभ मिलेगा लेकिन पाकिस्तान की धरती से चरमपंथ को बढ़ावा मिलता रहा और भारत उससे प्रभावित होता है तो इन तमाम बातों के बावजूद हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं. हमारी सरकार का यही पक्ष है और हम इस पर क़ायम हैं.''

बलूचिस्तान के मुद्दे पर सरकार को घेरे जाने की बातों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि साझा बयान के बारे में जो प्रचारित किया जा रहा है और इस संदर्भ में संयुक्त बयान का जो मतलब निकाला जा रहा है, वो सरासर ग़लत है.

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