बलूचिस्तान पर कोई सबूत नहीं:हॉलब्रूक

हॉलब्रूक
Image caption हॉलब्रूक अगस्त में भारत के दौरे पर आ रहे हैं.

अमरीका ने कहा है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप का कोई विश्वसनीय सबूत उन्हें नहीं दिखाया है.

अगस्त में भारत के दौरे पर आ रहे अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान मामलों पर अमरीका के ख़ास दूत रिचर्ड हॉलब्रूक ने वाशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान बलूचिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप का मामला कई बार उठाया गया है.

लेकिन क्या उन्हें विश्वसनीय सबूत भी दिखाया गया?

हॉलब्रूक का जवाब था, "जी नहीं."

पाकिस्तान पिछले कुछ समय से लगातार ये आरोप लगा रहा है कि भारत बलूचिस्तान में चल रहे अलगाववादी आंदोलन की चोरी छिपे मदद कर रहा है और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अपने वाणिज्य दूतावासों के ज़रिए उन्हें आर्थिक मदद भी पहुंचा रहा है.

शर्म अल शेख में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई बातचीत के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने भी बलूचिस्तान का मामला उठाया था और आनेवाले दिनों में उसपर बातचीत की पेशकश की.

भारत इन आरोपों को बेबुनियाद बताता है और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि हमारे पास छिपाने को कुछ भी नहीं है और अगर पाकिस्तान अपने अंदरूनी मामले को द्विपक्षीय मामला बनाना चाहता है तो भारत को कोई एतराज़ नहीं है.

बीच में कुछ ऐसी भी ख़बरें आईं थीं कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप से संबंधित दस्तावेज़ भारत को सौंपा है लेकिन अब पाकिस्तानी सूचना मंत्री ने भी इस ख़बर को ग़लत बताया है.

अमरीका के लिए भारत-पाकिस्तान की ये कूटनीतिक रस्साकशी सरदर्द बनी हुई है.

अमरीकी लगातार ये कोशिश कर रहे हैं कि पाकिस्तान अपनी पूर्वी यानि भारतीय सीमा से फ़ौज हटाकर ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में पश्चिमी सीमा पर तैनात करे और उनका कहना है कि पाकिस्तान को ये समझना होगा कि उन्हें ख़तरा भारत से नहीं अल क़ायदा और तालेबान से है.

लेकिन पाकिस्तान बलूचिस्तान का उदाहरण देकर कहता रहा है कि उन्हें भारत से भी ख़तरा है.

अमरीकी मीडिया में छपी रिपोर्टों के अनुसार हाल ही में पाकिस्तानी फ़ौज के प्रमुख जनरल अशफ़ाक कियानी ने अमरीका से कहा था कि वो लश्करे तैबा पर लगाम कस सकते हैं बशर्ते भारत बलूचिस्तान में दख़लंदाज़ी बंद कर दे.

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