मुशर्रफ़ पर देशद्रोह का मुक़दमा नहीं

परवेज़ मुशर्रफ़

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला चलाने संबंधी याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

अदालत ने कहा है कि मुशर्रफ़ पर दायर याचिका के तहत लगाए गए आरोपों को तय करने की सही जगह संसद भवन है, न कि सुप्रीम कोर्ट.

दरअसल, एक वकील हामिद ख़ान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी डाली गई थी कि पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए.

इसके लिए तर्क दिया गया था कि उन्होंने 1999 में अपनी ताक़त का ग़लत इस्तेमाल करते हुए शासन की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी और फिर संविधान का उल्लंघन करते हुए वर्ष 2007 में अपना कार्यकाल बढ़ा लिया था.

मुशर्रफ़ पर नवंबर 2007 में आपातकाल लगाने और मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के तमाम जजों को बर्खास्त करने का मामला भी उठाया गया है और आरोप है कि मुशर्रफ़ ने ऐसा इसलिए किया ताकि उनके फिर से चुने जाने को अदालत ख़ारिज न कर दे.

पर उन्हीं मुख्य न्यायाधीश की 14 सदस्यी पीठ ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को उठाने के लिए उपयु्क्त जगह नहीं है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट प्राधिकृत नहीं है.

राहत भी

माना जा रहा है कि मु्ख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के इस फ़ैसले से जहाँ एक ओर परवेज़ मुशर्रफ़ कुछ राहत महसूस करेंगे वहीं दूसरी ओर वर्तमान परिस्थितियों में पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए भी यह फैसला एक बड़ी राहत देने वाला है.

ऐसा इसलिए क्योंकि ताज़ा परिस्थितियों में सेना और सत्ता, दोनों ही सीमा और देश के भीतर भी चरमपंथियों से लड़ने, तालेबान से निपटने और अस्थिरता को कम करके एक स्थाई, शांत व्यवस्था क़ायम करने की कोशिश में लगे हुए हैं.

ऐसे वक़्त में अगर इस तरह का मामला न्यायालय में शुरू होता तो उससे एक तरह की राजनीतिक अस्थिरता के पैदा होने का ख़तरा बढ़ सकता था.

हालांकि कोर्ट ने अपने निर्णय के पीछे ऐसी किसी वजह को आधार नहीं बनाया है और साफ़ कहा है कि ऐसा करना उनके दायरे से बाहर की बात है.

हालांकि पिछले सप्ताह अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति और उनके वकील को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर इस बाबत अपना पक्ष रखने के लिए कहा था पर मुशर्रफ़ या उनका वकील, दोनों में से कोई भी अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुए.

परवेज़ मुशर्रफ़ पर ये आरोप पिछले कुछ बरसों के दौरान राजनीतिक मंचों से भी लगते रहे हैं और उन्होंने इस बाबत यही कहा है कि उन्होंने जो कुछ भी किया, देश के हित को ध्यान में रखकर किया.

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