पाकिस्तान में ईसाइयों की हत्या

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुई हिंसा में छह ईसाइयों की मौत हो गई है. कुछ दिन पहले वहाँ अफ़वाह फैली थी कि किसी ने क़ुरान को नुकसान पहुंचाया है. उसी के बाद से वहाँ तनाव चल रहा था.

अधिकारियों का कहना है कि ईसाइयों के घरों को आग लगा दी गई जिसमें चार महिलाएँ, एक पुरुष और एक बच्ची की मौत हो गई.

टीवी फ़ुटेज में दिखाया गया कि गोजरा कस्बे में कुछ घर जल रहे हैं, गलियों में मलबा बिखरा पड़ा है और लोग छतों पर से एक दूसरे पर गोलियाँ चला रहे हैं.

गोजरा कस्बा उस समय सुर्खियों में आया था जब एक शादी समारोह के दौरान ईसाइयों के घरों पर हमला कर दिया गया. नाराज़ भीड़ में शामिल लोगों का कहना था कि शादी के दौरान क़ुरान को नुकसान पहुंचाया गया है.

हिंसा

अधिकारियों के मुताबिक जिन अफ़वाहों की वजह से ये तनाव शुरु हुआ वो ग़लत निकली हैं. ईसाई समुदाय ने भी इन आरोपों से इनकार किया है.

रॉयटर्स ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शाहबाज़ भट्टी के हवाले से लिखा है कि ईसाइयों पर हमला उस भीड़ ने किया था जिन्हें कुछ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने गुमराह कर दिया था.

शाहबाज़ भट्टी ने पुलिस पर स्थिति को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया और कहा है कि वे शुक्रवार को गोजरा गए थे और कहा था कि ईसाइयों को सुरक्षा दी जाए.

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने हिंसा की आलोचना की है और जाँच के आदेश दिए हैं.

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि इस घटना से पाकिस्तान की छवि को नुक़सान पहुँचा है. पंजाब सरकार ने मामले की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं.

पाकिस्तान में ईसाई समुदाय की संख्या ज़्यादा नहीं है. 'आतंक के ख़िलाफ़ जंग' में अमरीका का साथ देने के बाद से पाकिस्तान में ईसाइयों के ख़िलाफ़ हमले होते रहे हैं.

ईसाई नेताओं का कहना है कि एक महीने के अंदर ये ऐसी दूसरी घटना है.

30 जून को पंजाब के ही कसूर कस्बे में ईसाइयों के करीब 100 घरों को आग लगा दी गई थी और कई ईसाई घायल हो गए थे.

मई, 2007 में पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में ईसाइयों को धमकी मिली थी कि अगर वे धर्मांतरित नहीं होते तो तो उन पर बम हमले किए जाएँगे.

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