मौतों में कमी का नैटो का वादा

Image caption एनर्स फ़ो रैसमूसन नैटो के नए महासचिव हैं

उत्तर एटलांटिक सहयोग संगठन (नैटो) के नए महासचिव एनर्स फ़ो रैसमूसन ने कहा है कि वे अफ़ग़ानिस्तान में आम नागरिकों की मौतों को न्यूनतम स्तर तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

उन्होंने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान संगठन की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है और नैटो का पहला लक्ष्य है कि अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव विश्वसनीय तरीके से करवाया जाए.

महासचिव बनने के चार दिन के अंदर ही वे अफ़ग़ानिस्तान के दौरे पर हैं. वे अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मिल चुके हैं और नैटो के अधिकारियों और सैनिकों से मिलने वाले हैं.

नैटो के करीब 64 हज़ार सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में तैनात हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में पहुँचने पर एनर्स फ़ो रैसमूसन का नैटो के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और अफ़ग़ान सरकार के अधिकारियों ने स्वागत किया.

बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के संवाददाता एडम माइनॉट का कहना है कि पदभार संभालने के चार दिन के अंदर ही अफ़ग़ान दौरा दर्शाता है कि अफ़ग़ानिस्तान में सफलता हासिल करने का नैटो महासचिव का इरादा दृढ़ है.

एनर्स फ़ो रैसमूसन ने कहा है कि नैटो की पहली प्राथमिकता अफ़ग़ानिस्तान में विश्वसनीय चुनाव करवाना है. वहाँ 20 अगस्त को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहा है.

आम नागरिकों की मौतों के बारे में उनका कहना था कि हालांकि नैटो की कुछ कार्रवाइयों में आम नागरिकों की मौत खेदजनक थी लेकिन उसे टाला नहीं जा सकता था.

उनका कहना था कि आम नागरिकों की मौतों की संख्या को न्यूनतम स्तर तक लाना उनकी प्राथमिकता है.

इन मौतों का अफ़ग़ानिस्तान में तीखा विरोध होता रहा है.

नैटो की भूमिका

देश के विभिन्न इलाक़ों में मतपेटियाँ और मतपत्र पहुँचाने और सुरक्षा मुहैया करवाने में नैटो सैनिक मदद कर रहे हैं.

माना जा रहा है कि नैटो महासचिव एनर्स फ़ो रैसमूसन कुछ ऐसे सैनिकों से भी मिलेंगे जो दक्षिण अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ मोर्चे पर लड़ रहे हैं.

इस साल अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा में वृद्धि हुई है और लड़ाई में 1100 लोग मारे जा चुके हैं. पिछले महीने ही 75 नैटो सैनिकों की मौत हो गई थी.

तालेबान को सत्ता से हटाने के बाद से अफ़ग़ानिस्तान में इस साल सबसे ज़्यादा हिंसा हुई है.

ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव करवाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या लोग तालेबान की धमकियों के बाद वोट डालने जाएँगे. बीबीसी संवाददाता ब्रायन हैनरहान के मुताबिक समस्या ये भी होगी कि लोग चुनाव नतीजों को स्वीकार करते हैं या नहीं.

नैटो के नए महासचिव के लिए एक बड़ी चुनौती ये होगी कि वो नैटो सदस्यों को अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिक भेजने के लिए राज़ी करवाएँ.

अमरीका के करीब 30 हज़ार सैनिक तैनात हैं जो कुल संख्या का लगभग आधा है. कई यूरोपीय देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में सैनिक भेजने में हिचकिचाहट दिखाई है.

महासचिव के अपने देश डेनमार्क के केवल 700 सैनिक वहाँ तैनात हैं.

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