अफ़ग़ान तस्करों पर निशाना

अमरीका ने तालेबान से संबंध रखने वाले 50 संदिग्ध अफ़ग़ान तस्करों को ऐसे लोगों की सूची में रखा है, जिन्हें या तो ज़िंदा पकड़ा जाना है या मार देना है. अमरीकी अख़बार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने यह रिपोर्ट दी है.

Image caption अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत में अफ़ीम की खेती होती है

अख़बार के मुताबिक़ अमरीका के दो जनरलों ने अमरीकी कांग्रेस को बताया है कि यह नीति अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संघर्ष के दौरान सेना के नियमों के तहत वैध है.

अख़बार ने एक ऐसे रिपोर्ट का हवाला दिया है, जो अभी जारी किया जाना है. इसके मुताबिक़ मादक दवाओं की तस्करी से मिलने वाली राशि तालेबान तक न पहुँचने देने को महत्वपूर्ण रणनीति की संज्ञा दी गई है.

अफ़ग़ानिस्तान में मादक दवाओं की तस्करी के ख़िलाफ़ अमरीका के अभियान में यह बड़ा बदलाव है.

सूची

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ सीनेट की विदेशी संबंध मामलों की समिति के साथ इंटरव्यू में अफ़ग़ानिस्तान में कार्यरत दो अमरीकी जनरलों ने कहा है कि चरमपंथ से जुड़े बड़े तस्करों को 'संयुक्त एकीकृत प्राथमिक लक्ष्य सूची' में रखा है.

ये रिपोर्ट अभी जारी की जानी है. इसका मतलब ये हुआ कि मादक दवाओं के इन संदिग्ध तस्करों को उन लोगों की सूची में रखा गया है, जिनमें चरमपंथी नेता रखे गए हैं. जिन्हें पकड़ने या जान से मार देने का फ़रमान जारी हो चुका है.

अख़बार के मुताबिक़ इनमें से एक जनरल ने सीनेट समिति को बताया, "हमारे पास 367 लोगों की सूची है, जिन्हें ज़िंदा पकड़ना या जान से मारना है. इनमें से 50 लोग ऐसे हैं जिनका ड्रग्स और चरमपंथ दोनों से नाता है."

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीनेट की इस रिपोर्ट में इन जनरलों की पहचान नहीं की गई है.

नीति

कई वर्षों से अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी नीति अफ़ीम की फसल को ख़त्म करने पर केंद्रित रही है.

लेकिन इस साल मार्च में अमरीकी दूत रिचर्ड हॉलब्रुकने कहा कि अफ़ीम की फसल को ख़त्म करने की अमरीकी नीति अप्रभावी रही है.

उन्होंने कहा था कि अफ़ीम की खेती ख़त्म करने की कोशिशों से तालेबान चरमपंथियों की तस्करी से पैसा उगाहने के क़दम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.

अफ़ग़ानिस्तान का दक्षिणी प्रांत हेलमंद अफ़ीम का प्रमुख उत्पादक है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई होने वाली अफ़ीम का 90 प्रतिशत यही पैदा होता है.

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