चीन की नीतियाँ अवास्तविक: दलाई लामा

दलाई लामा
Image caption हालांकि दलाई लामा और चीन सरकार के ताल्लुकात अभी बहुत ठंडे हैं.

निर्वासित तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने अल्पसंख्यों के बारे में चीन सरकार की नीति को विफल और अवास्तविक बताया है.

बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में दलाई लामा ने कहा कि चीन सरकार का रवैया सदैव ये रहा है कि कैसे अल्पसंख्यकों को नियंत्रित किया जाए, न कि ये पता लगाने की कोशिश हो कि स्थानीय लोगों की अपनी प्राथमिकताएँ क्या हैं.

दलाई लामा ने उइगर अल्पसंख्यक बहुल शिन्ज़ियांग प्रांत में हाल ही में भड़के दंगे को दुखद बताते हुए कहा कि वे किसी भी तरह की हिंसा को सही नहीं मानते.

तिब्बती नेता ने कहा कि वे चीन सरकार की ओर से किसी भी तरह के संपर्क को लेकर खुले मन से तैयार बैठे हैं.

हालांकि दलाई लामा और चीन सरकार के ताल्लुकात अभी बहुत ठंडे हैं.

दलाई लामा के दूतों और चीन सरकार के बीच जो वार्ताएँ हुआ करती थीं उनमें गतिरोध आ चुका है.

विदेशी नेताओं के साथ दलाई लामा की मुलाक़ातों से चीन की सरकार नाराज़ होती है क्योंकि उसे लगता है कि ये तिब्बत के विषय में विदेशी हस्तक्षेप के समान है.

पिछली बार दलाई लामा जब फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी से मिले तो चीन ने नाराज़ होकर यूरोपीय-संघ और चीन के बीच होनेवाला शिखर सम्मेलन रद्द ही कर डाला.

तिब्बत समस्या की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर अब दलाई लामा ने कहा," चीन सरकार हमारी समस्या को घरेलू समस्या मानती है. हम भी ऐसा ही मानते हैं."

तिब्बती धर्मगुरू ने इस बारे में अपनी सोच को और स्पष्ट करते हुए बिना किसी लागलपेट के कहा कि वे तिब्बत समस्या को चीन की घरेलू समस्या इसलिए मानते हैं क्योंकि ये समझदारी है जिससे कि संकट के हल की दिशा में बात बढ़ सकती है.

उन्होंने कहा कि इसके लिए बेहद आवश्यक है कि दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत हो और वे बातचीत फिर शुरू हो इसके लिए चीन की और से किसी भी तरह का संकेत मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

नीतियाँ विफल

उल्लेखनीय है कि दलाई लामा चीन के भीतर तिब्बत को सार्थक स्वायत्तता दिए जाने के बारे में आंदोलन कर रहे हैं.

1980 के दशक से ही उनके मध्यमार्गी दृष्टिकोण के कारण तिब्बत समस्या को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ख़ासी सहानुभूति मिली है और इसके लिए उनको नोबेल पुरस्कार भी दिया जा चुका है.

मगर चीन उनके प्रस्तावों को देश को बाँटने का एक प्रयास बताता है.

पिछले वर्ष ल्हासा और दूसरे तिब्बती क्षेत्रों में दंगे होने के कारण स्थिति और पेचीदा हो गई है.

वैसे तिब्बत समस्या को चीन के भीतर अल्पसंख्यकों की समस्या का एक दृष्टांत माना जाता है.

74 वर्षीय दलाई लामा कहते हैं कि चीन का साम्यवादी प्रशासन बाक़ी मामलों में तो वास्तविकताओं के हिसाब से अपने चाल और चरित्र में बदलाव करती रही है लेकिन अल्पसंख्यकों के संबंध में उनकी नीतियाँ विफल और अवास्तविक हैं.

उन्होंने कहा,"वे सदैव एक की नज़रिए से देखते हैं. कैसे सब कुछ बनाए रखा जाए, कैसे सब कुछ नियंत्रित रखा जाए. उन्हें इस बात की रत्ती भर भी परवाह नहीं रहती कि स्थानीय लोग क्या सोचते हैं."

वैसे दलाई लामा ने हाल ही में शिन्ज़ियाँग प्रांत में हुए दंगों को बेहद दुखद घटना बताया और कहा कि वे किसी भी तरह से हिंसा का समर्थन नहीं कर सकते.

शिन्ज़ियाँग में पिछले महीने उइगर अल्पसंख्यकों और हान चीनी लोगों के बीच हुई हिंसा में दो सौ से अधिक लोग मारे गए थे.

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