सदमे में हैं पाकिस्तान के ईसाई

ईसाई जिनके घर जला दिए गए हैं.
Image caption इन पीडि़त परिवारों को अपने साथी नागरिकों की मदद का अभी भी इंतज़ार है.

पाकिस्तान में एक तरफ़ 62वाँ स्वतंत्र दिवस मनाने की तैयारी हो रही है तो दूसरी ओर गोजरा के ईसाई अपने जलाए हुए घरों को फिर से बनाने के लिए चिंतित हैं.

इन ईसाइयों को पाकिस्तान के संस्थापक क़ायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना के उन शब्दों पर विश्वास है जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बराबर के नागरिक हैं और उनको पूरे अधिकार हैं.

गोजरा के ईसाई इस बात को मन में लिए हुए सरकारी सहायता और अपने साथी नागरिकों की मदद का इंतज़ार कर रहे हैं.

सांप्रदायिक हमला

पाकिस्तान में लोग अगस्त को ज़्यादा महत्व देते हैं. इसी अगस्त की पहली तारीख़ को पंजाब के शहर गोजरा में ईसाइयों के कई घर जला दिए गए. इसमें 8 लोगों की मौत हो गई.

गोजरा में ईसाइयों पर हुआ सांप्रदायिक हमला पाकिस्तान के लिए कोई नई बात नहीं है. जिन ईसाइयों को निशाना बनाया गया उन पर आरोप था कि उन्होंने कथित तौर पर क़ुरान का अपमान किया है लेकिन ईसाई इस बात से इनकार कर रहे हैं.

गोजरा ज़िला टोबा टेक सिंह का एक कस्बा है. यह फ़ैसलाबाद जिसे लॉयलपुर भी कहा जाता है, वहाँ से क़रीब 40 किमी दूर है.

जब मैं फ़ैसलाबाद से गोजरा पहुँचा तो मुझे इस बात का एहसास हुआ कि यहाँ के लोग एक-दूसरे को बरदाश्त नहीं करते हैं.

विरोध-प्रर्दशन

अपने जले हुए घर और बचे-खुचे सामान के साथ बैठे लियाक़त मसीह से जब मैंने पूछा कि आगजनी की घटना कैसे हुई तो उन्होंने कहा, “ कुछ पता नहीं क्या हुआ और कैसे हुआ है. पाँच मिनट पहले हमें कहा गया कि आप अपने-अपने घर छोड़ दो वरना आपको आपके बच्चों के साथ जला दिया जाएगा.”

उन्होंने बताया, "हमारे साथ बहुत ज़ुल्म हुआ है. हमें कोई यह बताए कि हमारा गुनाह क्या है."

आगजनी की इस घटना के एक दिन बाद गोजरा शहर में मुसलमानों ने ईसाइयों के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया जो बाद में हिंसक हो गया.

पुलिस की मौज़ूदगी में कुछ लोगों ने फायरिंग की और ईसाई बस्ती में आग लगा दी. इसमें क़रीब 40 घर जल कर राख हो गए. एक परिवार के पाँच सदस्यों सहित आठ लोग इस घटना में मारे गए.

अख़लास मसीह के परिवार के लोग भी इस घटना में मारे गए. उन्होंने बताया कि आग लगाने के लिए तेज़ाब का प्रयोग किया गया.

किसी को नहीं छोड़ा

उन्होंने बताया, "वे लोग जब हमारे घर में घुसे तो हमारी औरतें और बच्चे एक कमरे में छिप गए. हमलावरों ने घर में आग लगा दी. इस आग में एक बच्चा और चार महिलाएँ जलकर मर गईं."

ईसाइयों की बस्ती के साथ ही मुसलमानों की एक बस्ती है. प्रदर्शन की शुरुआत भी वहीं से हुई थी. मोहम्मद मूसा इसी बस्ती में दुकान चलाते हैं. उन्होंने इस घटना के लिए ईसाइयों को ज़िम्मेदार ठहराया.

मूसा कहते हैं, "ईसाइयों के तीन लड़कों ने फ़ायरिंग शुरू की. इसमें तीन-चार बच्चे ज़ख़्मी हो गए. हिंसा की शुरुआत भी यहीं से हुई."

इस घटना के विरोध में ईसाई समुदाय ने देश भर में विरोध-प्रदर्शन किया. ईसाइयों ने उन नियमों के ख़त्म करने की माँग की जो पैग़ंबर इस्लाम और क़ुरान के अपमान के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

सांसद अकरम मसीह गिल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "पाकिस्तान में ईश निंदा का जो क़ानून है, उसे ख़त्म किया जाए क्योंकि यह ईसाइयों के ख़िलाफ़ लटकती तलवार है."

Image caption ईसाई समुदाय उस क़ानून को ख़त्म करने की माँग कर रहा है जिसमें ईश निंदा को अपराध बताया गया है.

उन्होंने कहा कि ईसाइयों के ख़िलाफ़ दर्ज सभी मामले बेबुनियाद है.

पाकिस्तान में पैग़ंबर इस्लाम और क़ुरान का अपमान करने वाले को आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है.

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ़ पाकिस्तान के हुसैन नक़ी ने भी इस क़ानून को ख़त्म करने की माँग की.

उन्होंने कहा कि यह क़ानून कट्टरपंथियों के पास एक ऐसा हथियार है, जिससे वे किसी को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं.

ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ़ पाकिस्तान की गोजरा से संबंधित रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावरों का संबंध प्रतिबंधित चरमपंथी गुट से है और पुलिस को इसकी जानकारी पहले से थी.

संबंधित समाचार