स्वात घाटी में चार साल बाद जश्ने आज़ादी

पाकिस्तान में यौमे आज़ादी
Image caption पाकिस्तान में आज़ादी का जश्न कई इलाक़ों में धूमधाम से मना

पाकिस्तान में स्वात घाटी में चार वर्ष के अंतराल के बाद पहली बार आधिकारिक तौर पर जश्ने आज़ादी के कार्यक्रम आयोजित किए गए.

स्वात घाटी के मुख्य शहर मिंगोरा में पाकिस्तान के झंडे लहराते दिखाए दिए. पाकिस्तानी सेना और सरकार ने चरमपंथियों के खिलाफ़ सैनिक अभियान की कामयाबी का प्रदर्शन के लिए इस मौक़े का भरपूर इस्तेमाल किया.

बीबीसी संवाददाता अब्दुल हई काकड़ ने बताया कि कार्यक्रम में शामिल हुए पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के एक मंत्री मियाँ इफ़्तेख़ार ने चरमपंथियों के बारे में यहाँ तक कहा कि "जो लोग हमारे सिर की क़ीमत लगा रहे थे आज वे छिपते फिर रहे हैं."

स्वात घाटी से ऐसी ख़बरें भी मिल रही हैं कि सैनिकों ने लोगों से कहा कि वे अपने घरों पर पाकिस्तान का झंडा लगाएँ और कई लोगों ने बताया कि कई गाड़ियों पर ज़बरदस्ती पाकिस्तानी झंडे लगा दिए गए.

मिंगोरा में रहने वाली एक स्कूली लड़की ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हम आज बहुत ख़ुश हैं, तीन महीने तक घर से बाहर रहने के बाद और क़र्फ्यू की हालत में दिन-रात गुज़ारने के बाद हमें लग रहा है कि आज हमें सचमुच आज़ादी मिली है."

लेकिन बीबीसी से बातचीत में कई लोगों ने कहा कि उनके मन में कोई उत्साह नहीं है क्योंकि उन्हें "जश्न नहीं अमन चाहिए".

बलूचिस्तान से बीबीसी के संवाददाता अयूब तरीन ने बताया कि वहाँ सरकारी तौर पर जश्ने आज़ादी के कार्यक्रम तो हुए लेकिन बलोच जनता ने उसमें कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई.

बलोच राष्ट्रवादियों ने स्वतंत्रता दिवस को काला दिवस मनाने की घोषणा की थी और उन्होंने सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार किया.

कश्मीर

राजधानी इस्लामाबाद में स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर अपने भाषण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान उनके देश की विदेश नीति का मुख्य लक्ष्य है.

उन्होंने कहा, "भारत और पाकिस्तान इस दिशा में जो प्रयास कर रहे हैं उससे उम्मीद है कि समस्या का कोई ठोस हल निकलेगा."

Image caption पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में झंडा फ़हराया

गिलानी ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि "मुझे हाल की बैठकों से बहुत उम्मीद जगी है."

इससे पहले पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने संसद में घोषणा की कि लगभग 100 वर्ष पुराना फ्रंटियर क्राइम रेगुलेशन यानी एफ़सीआर क़ानून ख़त्म किया जा रहा है और अब क़बायली इलाक़ों में राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति होगी.

क़बायली इलाक़ों में राजनीतिक दलों के काम करने पर कानूनी प्रतिबंध है, जिसकी वजह से राष्ट्रीय स्तर की पार्टियाँ इन इलाक़ों में अपनी पहुँच नहीं बना सकी थीं जबकि इस्लामी पार्टियाँ मस्जिदों के ज़रिए अपनी गतिविधियाँ चलाती रही हैं.

बीबीसी से लंबे समय तक जुड़े रहे वरिष्ठ विश्लेषक रहीमुल्लाह यूसुफ़ज़ई का कहना है कि इसका मक़सद कबायली इलाक़े में इस्लामी पार्टियों और चरपमपंथियों के बढ़ते असर को रोकना है.

राष्ट्रपति ज़रदारी ने संसद में घोषणा की है कि राजनीतिक पार्टियों को कबायली इलाक़ो में काम करने की अनुमति होगी लेकिन पूरा विवरण अभी तक सामने नहीं आया है.

स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने कहा है कि देश इस समय एक बहुत ही अहम मोड़ से गुज़र रहा है और लोगों को यह समझना चाहिए कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई इस्लाम के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं है बल्कि इस्लाम से भटके हुए लोगों के ख़िलाफ़ अभियान है.

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