अफ़ग़ानिस्तान में प्रचार ख़त्म

  • 17 अगस्त 2009
चुनावी पोस्टर
Image caption चुनावी पोस्टर और बैनर हर जगह दिख रहे हैं

अफ़ग़ानिस्तान में गुरुवार को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन उम्मीदवारों ने मतदाताओं का विश्वास हासिल करने की ज़ोरदार कोशिश की है.

देश में हिंसा और तालेबान की धमिकयों के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति चुनाव कराए जा रहे हैं जिसके लिए 20 अगस्त को मतदान होगा.

बीबीसी की अफ़ग़ान सेवा ने एक सर्वेक्षण किया है जिसके मुताबिक़ देश के 30 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर सरकार का या तो बहुत कम नियंत्रण है या बिल्कुल भी नहीं है.

हिंसा की आशंका की वजह से राष्ट्रपति चुनाव में इस बार कम ही मतदान की संभावना व्यक्त की जा रही है लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि लोकतंत्र की जड़ें देश में धीरे-धीरे जम रही हैं.

इन चुनावों में मौजूदा राष्ट्रपति हामिद करज़ई के मुक़ाबले 30 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं जिनमें दो पूर्व मंत्री भी शामिल हैं.

राष्ट्रपति करज़ई को मुख्य चुनौती पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मिल रही है, इस बार के चुनाव में हामिद करज़ई के कार्यकाल की उपलब्धियों और नाकामियों पर ख़ासा ज़ोर दिया जा रहा है.

काबुल से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लोगों के वोट पाने के लिए उम्मीदवार हरसंभव तरीक़े का सहारा ले रहे हैं, रैलियाँ हो रही हैं, पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं और रविवार की रात को राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों के बीच हुई बहस का टीवी पर प्रसारण किया गया.

लेकिन यह भी सच है कि ज्यादातर अफ़ग़ान आबादी तक उम्मीदवार नहीं पहुँच पाए हैं क्योंकि वे दूर-दूराज़ के इलाक़ों में रहते हैं जहाँ सुरक्षा की स्थिति काफ़ी चिंताजनक है.

तालेबान चरमपंथियों ने कहा है कि वे चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले हर व्यक्ति को अपना निशाना मानते हैं, उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि वे 'पश्चिमी देशों के फ़रेब' से दूर रहें.

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