पाकिस्तान ने सूचनाएँ मांगीं

  • 18 अगस्त 2009
पाकिस्तानी सैनिक
Image caption पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाक़े में कई चरमपंथी संगठन सक्रिय हैं

भारत की इस आशंका पर कि पाकिस्तानी चरमपंथी संगठन भारत में फिर से हमला करने की कोशिश कर सकते हैं, पाकिस्तान ने भारत से कहा है कि वह ऐसी सूचना उपलब्ध करवाए जिससे कि 'हमले को समय से पहले रोका जा सके'.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को सुरक्षा के मसले पर आयोजित मुख्यमंत्रियों की एक बैठक में यह आशंका जताई थी.

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया वहाँ विदेश विभाग में महा निदेशक (दक्षिण एशिया) अफ़्रासियाब मेहदी हाशमी के ज़रिए भारत के कार्यकारी उप महानिदेशक को दी गई हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जो बयान जारी किया गया है, उसमें हाशमी के हवाले से कहा गया है, "हम पूरी संजीदगी के साथ कह रहे हैं कि भारत हमें वो जानकारियाँ उपलब्ध करवा दे तो हम किसी भी तरह के आतंकवादी हमले को रोकने में पूरी तरह से सहयोग करने को तैयार हैं."

उनका कहना था कि भारत के प्रधानमंत्री के बयान पर 'गंभीर और फ़ौरन कार्रवाई' की ज़रुरत है.

उन्होंने 'आतंकवाद' को 'साझा दुश्मन' बताते हुए कहा, "पाकिस्तान ख़ुद भी आतंकवाद का शिकार रहा है."

हाशमी ने कहा कि पिछले महीने शर्म-अल-शेख़ में दोनों देशों के बीच हुई बैठक में यह सहमति भी बनी थी कि 'दोनों देश किसी भी विश्वसनीय और कार्रवाई योग्य सूचना को एक-दूसरे से तत्काल साझा करेंगे'.

लेकिन इससे पहले पाकिस्तान के सूचना राज्यमंत्री समसाम अली बुख़ारी ने कराची में मनमोहन सिंह के बयान को अनावश्यक बताया था.

उनका कहना था, "मेरे ख़याल से (मनमोहन सिंह का) बयान अनावश्यक है और उन्हें ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था क्योंकि भारत और पाकिस्तान बेहतर संबंधों की ओर बढ़ रहे हैं."

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा था कि भारत के पास इस बारे में पुष्ट जानकारी है कि पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन फिर से हमलों की कोशिश कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मुंबई हमले के बाद केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से कई प्रभावी क़दम उठाए गए हैं पर ज़रूरत इस बात की है कि इस दिशा में किए गए प्रयासों पर नियमित रूप से निगरानी भी रखी जाए.

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