श्रीलंका को आगाह किया

Image caption तमिल समुदाय के हज़ारों लोग शिविरों में रह रहे हैं

अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आगाह किया है कि अगर श्रीलंका सरकार अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के साथ सत्ता नहीं बाँटती है तो वहाँ फिर से हिंसा भड़क सकती है.

विदेश उपमंत्री रॉबर्ट ब्लेक ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि सत्ता के विकेंद्रीकरण में हो रही देरी के कारण तमिल विद्रोहियों को ये मौका मिल जाएगा कि वो दोबारा संगठित हो जाएँ.

तीन महीने पहले श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में अपनी जीत घोषित कर दी थी.

अमरीकी विदेश उपमंत्री की इस चेतावनी का मतलब है कि श्रीलंका में सामाजिक समन्वय की प्रक्रिया में हो रही देरी से पश्चिमी देश में अंसतोष बढ़ने लगा है.

'जल्द हो काम'

जब श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच युद्ध ख़त्म हुआ था तो ये उम्मीद जताई जा रही थी कि इसके बाद अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के साथ सत्ता बाँटने को लेकर समझौता हो पाएगा.

लेकिन श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने हाल ही में कहा है कि कोई भी राजनीतिक हल उनके दोबारा चुने जाने के बाद ही निकाला जा सकता है. उम्मीद है कि वे दोबारा अगले साल चुने जा सकते हैं.

अमरीकी विदेश उपमंत्री ने बीबीसी से बातचीत में कहा है, “इस बात की आशंका है कि श्रीलंका सरकार के रवैये से तमिल समुदाय अलग-थलग महसूस करेगा और समाज में फिर से विभाजन हो जाएगा जिससे तमिल विद्रोहियों को दोबारा मौका मिलेगा.”

उनका कहना था, “इसलिए ये बेहद ज़रूरी है कि श्रीलंका सरकार तमिल समुदाय के साथ बातचीत करे- न सिर्फ़ देश में बल्कि श्रीलंका से बाहर भी.”

रॉबर्ट ब्लेक ने कहा कि शिविरों में रह रहे विस्थापितों की स्थिति का सीधा संबंध श्रीलंका को अमरीका से मिलने वाली आर्थिक मदद से है. उन्होंने कहा, “पुनर्वास और पुनर्निमाण जैसे कामों के लिए अमरीका कितना पैसा देगा ये बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर किए गए वादों को श्रीलंका सरकार कितना निभा पाई है और सत्ता विकेंद्रीकरण पर कितना काम हुआ है.”

श्रीलंका में अधिकारियों का कहना है कि वे नागरिकों को शिविरों से घर लौटने की अनुमति देंगे लेकिन उससे पहले वे ये जाँच करना चाहते हैं कि कहीं वे तमिल विद्रोही तो नहीं है.

उनके मुताबिक सामाजिक समन्वय की प्रक्रिया पर सर्वसम्मति बनाने में वक़्त लगेगा.

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