हिंसा की ख़बर न देने की सलाह

अफ़ग़ानिस्तान ने घरेलू और विदेशी मीडिया को सलाह दी है कि अगर मतदान के दिन मतदाताओं में हिंसक घटनाओं से भय का माहौल बनता है तो वे मतदान के दिन इसकी रिपोर्टिंग न करें.

20 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है.

अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, “सब घरेलू और विदेशी मीडिया एजेंसियों से अपील है कि गुरुवार को सुबह छह बजे से शाम आठ बजे तक होने वाले मतदान के दौरान अगर हमले होते हैं तो वे इसके बारे में ख़बर न दें.”

पत्रकारों और मानवाधिकार संगठनों ने इस क़दम की आलोचना की है.

चुनाव प्रचार के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा की कई घटनाएँ हुई हैं. मंगलवार को हुई हिंसा में अफ़ग़ानिस्तान में 20 लोग मारे गए थे.

इसमें नैटो का एक सैनिक और नौ अफ़ग़ान नागरिक शामिल हैं. तालेबान ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली.

राष्ट्रपति निवास पर रॉकेट से हमला भी किया गया. आमतौर पर शांत रहने वाले उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में एक उम्मीदवार की हत्या कर दी गई और बदख़्शां में तीन कर्मचारियों की कार बम हमले में मौत हो गई.

इसके बाद आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने सभी मीडियाकर्मियों से कहा है कि वो ऐसे घटनास्थलों पर न जाएँ जहाँ आत्मघाती हमले, विस्फोट या रॉकेट से हमले हुए हों ताकि जाँच के लिए ज़रूरी सबूत नष्ट न हों.

'हिंसा की ख़बरें न दें'

राष्ट्रपति करज़ई के प्रवक्ता साइमक हेरावी का कहना था, “इस फ़ैसले से मीडिया के नकारात्मक असर से निपटने में मदद मिलेगी. अगर हिंसा होती है तो मीडिया उसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश नहीं कर पाएगा ताकि लोग डर के मारे वोट देने का फ़ैसला न लें.”

लेकिन पत्रकारों का कहना है कि अफ़ग़ान लोगों को ये जानने का हक़ है कि सुरक्षा की दृष्टि से कोई ख़तरा तो नहीं है.

अफ़ग़ान स्वतंत्र पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहीमुल्ला समंदर ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि लोगों को ख़बरों से वंचित रखने वाले इस क़दम का संगठन आलोचना करता है.

मानवाधिकर संगठन ह्यूमन राइट्स वाच का कहना है कि हिंसा की रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगाना मीडिया की स्वतंत्रता का उल्लंघन है.

अफ़ग़ान सरकार ने ये क़दम चुनाव से पहले हुई हिंसा को देखते हुए उठाया है.

वर्ष 2001 में तालेबान को सत्ता से हटाए जाने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में दूसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहा है.

माना जा रहा है कि इस दौड़ में वर्तमान राष्ट्रपति हामिद करज़ई आगे हैं हांलाकि कई संवाददाताओं का कहना है कि पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला से उन्हें कड़ी चुनौती मिल सकती है और रन-ऑफ़ चुनाव हो सकता है.

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