चुनावी हिंसा में 27 लोगों की मौत

तालेबान चरमपंथियों के हमलों के बीच अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान पूरा हो गया है. अब मतगणना शुरू हो गई है. अधिकारियों ने मतदान का समय एक घंटे बढ़ाया था.

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक़ चुनावी हिंसा में 27 लोगों की मौत हो गई हैं. मारे गए लोगों में नौ सैनिक, नौ अफ़ग़ान पुलिसकर्मी और नौ आम नागरिक शामिल हैं.

अधिकारियों ने बताया कि मतदान के दौरान हिंसा की 139 घटनाएँ हुईं. इन घटनाओं में 52 लोग घायल भी हुए हैं. इनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं.

इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति हामिद करज़ई को 30 से ज़्यादा उम्मीदवार चुनौती दे रहे हैं. देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी. मतदान के दौरान तीन लाख से ज़्यादा अफ़ग़ान सुरक्षाकर्मियों और अंतरराष्ट्रीय सैनिकों को तैनात किया गया था.

मतदान

देश में मतदान केंद्र स्थानीय समय के मुताबिक़ सुबह सात बजे ख़ुल गए. वर्ष 2001 के बाद ये अफ़ग़ानिस्तान में दूसरा प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव है.

लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि चुनाव की पूरी तैयारी अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों ने ख़ुद की है.

राजधानी काबुल में लोगों को मतदान में हिस्सा लेने के लिए ख़ूब उत्साहित किया गया.

काबुल में रहने वाले मुर्तज़ा ने बीबीसी को भेजे एक ईमेल में कहा है, "मैं मतदान करने का इच्छुक हूँ. लेकिन सुबह जब मैं ऑफ़िस के रास्ते में था, तो मैंने सूनी गलियाँ देखी और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को देखा. मैं मतदान के लिए अपनी ज़िंदगी खोना नहीं चाहता."

लेकिन मीरवाइज़ जैसे कई लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया. वे कहते हैं, "मैं अपने को सुरक्षित महसूस कर रहा हूँ. मतपत्र में छेद करना ही एकमात्र समस्या थी."

चुनाव पूर्व हुए कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार हामिद करज़ई मतदाताओं के लगभग 45 प्रतिशत समर्थन के साथ चुनाव में आगे हैं जबकि पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला 25 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर हैं.

हामिद करज़ई या किसी और को राष्ट्रपति चुने जाने के लिए उन्हें कम से कम 51 प्रतिशत मतों की ज़रुरत होगी. अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो फिर से मतदान की नौबत आएगी.

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