पाकिस्तान में हीरो बने जसवंत

अपनी किताब में मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ़ के कारण जसवंत सिंह को भले की पार्टी से निकाल दिया गया, लेकिन जिन्ना के देश में उनके लिए सहानुभूति पैदा हुई है.

Image caption जसवंत सिंह को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया है

जानकारों का मानना है कि जसवंत सिंह ने जिन्ना की तरीफ़ नहीं की बल्कि इतिहास को बयां किया है और यह दोनों देशों के लोगों को और क़रीब लाने में महत्वपूर्ण हो सकता है.

जसवंत सिंह को भारतीय जनता पार्टी से निकाले जाने की ख़बर पाकिस्तान के सभी टीवी चैनल्स और समाचार पत्रों में छाई रही.

उनको एक वरिष्ठ इतिहासकार के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिन्होंने सच्चाई बयां की है. साथ ही भारतीय जनता पार्टी की भी काफ़ी आलोचना हो रही है.

जाने-माने विश्लेषक आमिर लतीफ़ मानते हैं कि पाकिस्तानियों के दिलों में जसवंत सिंह के लिए सम्मान ओर बढ़ गया है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, “ज़ाहिर बात है कि पाकिस्तान में जसवंत साहब की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हो गई है. अगर जसवंत सिंह साहब को पार्टी से न निकाला जाता तो वह ख़ुद बीजेपी के लिए ज़्यादा अच्छा होता.”

आमिर लतीफ़ के मुताबिक़ जसवंत सिंह ने अपनी किताब में जिन्ना की तारीफ़ नहीं की बल्कि इतिहास को ठीक तरीक़े से बयान किया है. यही बात लाहौर में रहने वाले वरिष्ठ लेखक हसन निसार ने भी कही.

उन्होंने कहा, “इस मामले में जसवंत सिंह ने जो कहा है, उसको तारीफ़ या आलोचना की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए बल्कि इसको इतिहास की दृष्टि से देखा जाए.”

हसन निसार कहते हैं, “जसवंत सिंह ने जो कुछ भी लिखा है, वह बुनियादी तौर पर तथ्यों को सामने रख कर लिखा है. उन्होंने एक सच्चे और ईमानदार आदमी के तौर पर हक़ीक़त लिखी है.”

विवाद

ग़ौरतलब है कि 2005 में जब लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष नेता कहा था, तब भी भाजपा में ऐसी ही नाराज़गी थी और इसी की वजह से आडवाणी को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटना पड़ा था.

उस समय भी पाकिस्तान में आडवाणी के इस बयान का स्वागत किया गया था. हसन निसार के अनुसार दोनों देशों में ऐसे तत्व हैं जो इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “कुछ महीनों पहले की बात है, बात चली थी कि हमारे पाठ्यक्रम की किताबों में बच्चों को उपमहाद्वीप का इतिहास पढ़ाया जाए, जिसमें आशोक और चंद्रगुप्त मौर्य हों.”

उन्होंने आगे बताया कि यहाँ के कुछ लोगों इस पर आपत्ति जताई और कहा कि अशोका और चंद्रगुप्त का उनसे क्या संबंध है.

लेकिन उन्हें ये जानना चाहिए कि अशोक दी ग्रेट और चंद्रगुप्त के बग़ैर उपमहाद्वीप के इतिहास का कोई अस्तित्व नहीं है.

हसन निसार ने यह भी बताया कि पाकिस्तान में अगर कोई लेखक इसी तरह महात्मा गाँधी की तरीफ़ करे तो उन्हें भारत का एजेंट और ग़द्दार कहा जाएगा.

जानकार मानते हैं कि जसवंत सिंह जैसे लोगों का आगे आना और इतिहास को ठीक तरीक़े से बयां करना, दोनों देशों की शांति और लोगों को क़रीब लाने के लिए ज़रूरी है.

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