अब नज़र एलटीटीई की संपत्ति पर

श्रीलंका

श्रीलंका सरकार ने कहा है कि दुनिया के जिन देशों की ज़मीन पर एलटीटीई के लड़ाके या संपत्ति मौजूद हैं, उनको चाहिए कि उन्हें अब श्रीलंका सरकार के हवाले कर दें.

श्रीलंका के रक्षा सचिव गोताब्या राजापक्षा ने सरकार की ओर से अन्य देशों के सामने यह मांग रखी है.

माना जा रहा है कि बाहर के देशों में एलटीटीई की पर्याप्त संपत्ति है और इसका मूल्य लाखों अमरीकी डॉलर में हो सकता है.

रक्षा सचिव की ओर से ताज़ी घोषणा ऐसे समय में आई है जब पिछले दिनों ही तमिल विद्रोही संगठन के नए नेता सेलवरासा पद्मनाथन को श्रीलंका सरकार ने अपनी गिरफ़्त में ले लिया है.

इस महीने की शुरूआत में पद्मनाथन को एक दक्षिण-पूर्व एशियाई देश से हिरासत में ले लिया गया था. गिरफ़्तार करने के फौरन बाद एक गुप्त ऑपरेशन के तहत उन्हें कोलंबो लाया गया था. फिलहाल श्रीलंका सरकार के रक्षा अधिकारी नए एलटीटीई प्रमुख से पूछताछ कर रहे हैं.

ध्यान रहे कि इसी वर्ष मई महीने में श्रीलंका सरकार ने एलटीटीई पर अपनी जीत की घोषणा की थी. इससे पहले एक लंबे सशस्त्र अभियान के दौरान बड़ी संख्या में एलटीटीई लड़ाके मारे गए थे. एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण भी इस अभियान के दौरान मारे गए थे.

एलटीटीई को झटका

Image caption सेना के सशस्त्र अभियान में बेघर हुए हज़ारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं.

प्रभाकरण की मौत के बाद ऐसा लग रहा था कि एलटीटीई का अस्तित्व फिर से शायद सिर न उठा सके पर कुछ समय बाद ही एलटीटीई के एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता, सेलवरासा पद्मनाथन को एलटीटीई का नया नेता घोषित कर दिया गया था.

श्रीलंका सरकार ने एक अभियान के तहत इन्हें श्रीलंका से बाहर जानकारी के आधार पर हिरासत में ले लिया. तीन दशकों तक एलटीटीई को हथियार और गोलाबारूद उपलब्ध कराते आए पद्मनाथन अब सेना को पूछताछ में थोड़ी थोड़ी जानकारी दे रहे हैं.

बताया जाता है कि हथियारों को हासिल करने और उपलब्ध कराने के लिए एलटीटीई के पास विदेशों में एक बहुत ही व्यस्थित तंत्र था.

विदेशों मे एलटीटीई ने खुदरा दुकानों से लेकर रीयल इस्टेट, पैट्रोल पंपों, मंदिरों, व्यावसायिक जहाज़ों और फ़िल्मों में भी पैसा लगा रखा था लेकिन ये सारे धंधे अलग अलग नामों से किए जा रहे थे क्योंकि कई मुल्कों मे इस संगठन पर पाबंदी थी.

एक अनुमान के मुताबिक एलटीटीई के पास विदेशों मे 30 करोड़ डॉलर से लेकर एक अरब डॉलर तक की संपत्ति है और पद्मनाथन को उसके बारे में पुरी जानकारी है. राजापक्षा ने कहा की अगर ये साबित हो जाता है कि ये सारा धन एलटीटीई का है तो उन देशों को ये संपत्ति और बचे हुए तमिल छापामारों को श्रीलंका के हवाले कर देना चाहिए.

राजापक्षा ने कहा कि अगर पश्चिमी देश आतंकवाद का मुक़ाबला करने में सचमुच गंभीर हैं तो उन्हें एलटीटीई जैसे चरमपंथी संगठन के लोगों को अपने यहां शरण नहीं देनी चाहिए.

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