बुगती की बरसी पर हड़ताल

नवाब मोहम्मद अकबर ख़ान बुगती
Image caption नवाब मोहम्मद अकबर ख़ान बुगती अगस्त 2006 में पाकिस्तानी सेना के एक हमले में मारे गए थे.

पाकिस्तान के बलोच राष्ट्रवादी नेता नवाब मोहम्मद अकबर ख़ान बुगती की मौत की तीसरी बरसी के अवसर पर बुधवार को बलूचिस्तान के अधिकतर हिस्सों में शटर डाउन और पहिया जाम हड़ताल रखी गई जबकि बलोच राष्ट्रवादी पार्टियों की तरफ़ से पूरे प्रांत में काला दिन मनाया गया.

बलोच नेशनल फ्रंट की अपील पर कोन्टा और अंदरूनी बलूचिस्तान के अनेक बड़े शहरों में पूरी तरह से शटर डाउन और पहिया जाम हड़ताल हुई है.

इस दौरान कोन्टा की तमाम दुनानें और व्यासायिक केंद्र सुबह से ही बंद रहे जबकि सड़कों पर यातायात ना के बराबर था और सरकारी दफ़्तरों में भी कर्मचारियों की संख्या बहुत कम थी.

हड़ताल के अवसर पर प्रांतीय सरकार ने न केवल कोन्टा शहर में दफ़ा 140 लागू करके हर तरह के जलसों पर पाबंदी लगाई बल्कि पाँच हज़ार पुलिस कर्मचारियों की तैनाती के साथ-साथ अन्य सुरक्षा इंतज़ाम भी किए. सुरक्षा कर्मचारियों ने शहरों के अंदरूनी इलाक़ों में भी गश्त लगाई.

शहर में सबसे ज़्यादा पुलिस की नई चौकियाँ लगाई गईं. अनेक राष्ट्रीय राजमार्गों को भी हर तरह के यातायात के लिए बंद कर दिया गया था.

दूसरी तरफ़ नवाब अकबर ख़ान बुगती की बरसी के अवसर पर बलोच बार एसोसिएशन की अपील पर बलोच वकीलों ने भी प्रांत भर में अदालतों का बहिष्कार किया.

बरसी के अवसर पर जम्हूरी वतन पार्टी यानी लोकतांत्रिक राष्ट्र पार्टी (हाली) गुट से संबंध रखने वाले दर्जनों लोगों ने बुधवार को कोन्टा प्रेस क्लब के सामने एक विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया.

कोन्टा के पश्चिमी हिस्से में एक धमाका हुआ जिसमें एक पुलिसकर्मी सहित दो लोग घायल हो गए.

बुगती:विद्रोही नेता

पाकिस्तान सरकार ने कहा था किबलूचिस्तान में 26 अगस्त 2006 को सुरक्षा बलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में विद्रोही क़बायली नेता नवाब अकबर बुगती की मौत हो गई थी.

नवाब अकबर बुगती दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान के सबसे प्रभावशाली क़बायली नेता थे और विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे.

संवाददाताओं का कहना है कि नवाब अकबर बुगटी बलूच क़बायलियों के लंबे समय से चले आ रहे विद्रोह के प्रमुख नेता थे.

बलूचिस्तान में तेल और खनिज उत्पादन में होने वाली आय में हिस्सेदारी भी उनकी माँग का प्रमुख हिस्सा थी.

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और यहाँ सबसे अधिक खनिज संपदा है. यहाँ से पाकिस्तान को तेल का बड़ा हिस्सा मिलता है.

लेकिन कई दशकों से स्थानीय क़बायली लोग पाकिस्तान सरकार के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं.उनका आरोप है कि सरकार खनिज और तेल की कमाई तो ले जाती है लेकिन बदले में क्षेत्र को कुछ नहीं मिलता.

अफ़ग़ानिस्तान और ईरान की सीमा पर स्थित इस प्रांत का रणनीतिक महत्व भी बहुत है और व्यावसायिक महत्व भी.

यहाँ अरब सागर में बंदरगाह के निर्माण पर करोंड़ों रुपए का निवेश किया गया है.

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