'भारत बातचीत में झिझक रहा है'

  • 29 अगस्त 2009
शाह महमूद क़ुरैशी
Image caption क़ुरैशी ने कहा कि बातचीत ही आगे बढ़ने का एक मात्र रास्ता है

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि ऐसा लगता है कि भारत अपने अंदरूनी राजनीतिक हालात की वजह से शांति वार्ता फिर से शुरू करने में झिझक रहा है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर बनाने की दिशा में बातचीत ही एक मात्र रास्ता हो सकता है.

उधर भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान में कुछ ताक़तें हैं जो दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं होने देना चाहती हैं.

राजस्थान के बाड़मेर ज़िले का दौरा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हम बहुत कुछ करना चाहते हैं. राजस्थान सीमा पर भी और पंजाब सीमा पर भी.”

स्थानीय लोगों ने यह माँग भी उठाई कि थार ऐक्सप्रेस को बाड़मेर में भी रोका जाना जाना चाहिए तो प्रधानमंत्री ने कहा, “अभी रिश्ते सामान्य नहीं हैं. रिश्ते सामान्य होंगे तो थार एक्सप्रेस को बाड़मेर में रोकने पर ज़रुर बातचीत होगी.”

ग़ौरतलब है कि थार एक्सप्रेस राजस्थान सीमा से होकर पाकिस्तान और भारत के बीच चलती है.

एक टेलीवीज़न चैनल को दिए इंटरव्यू में शाह महमूद क़ुरैशी ने इस संभावना से इनकार किया कि पाकिस्तान पश्चिमी देशों की सलाह पर भारत से मिलने वाली सीमा पर तैनात अतिरिक्त सैनिकों को हटाने पर कोई कार्रवाई करेगा.

कुछ पश्चिमी देशों का कहना है कि पाकिस्तान को अफ़ग़ान से मिलने वाले सीमावर्ती इलाक़ों में चरमपंथी गतिविधियों का सामना करने पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए.

शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि यह पाकिस्तान का बिल्कुल अंदरूनी मामला है कि वह किस मुद्दे पर क्या फ़ैसला ले.

शाह महमूद क़ुरैशी ने इन सुझावों को भी ख़ारिज करने की कोशिश की कि नवंबर 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों में हाथ होने के मामले में जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की भारत की माँग पर दोनों देशों के बीच कोई मतभेद हैं.

उन्होंने कहा कि हाफ़िज़ मोहम्मद सईद पर क़ानूनी अदालत में मुक़दमा चलाने के लिए “क़ानूनी रूप से मज़बूत सबूतों” की ज़रूरत है और अगर भारत के पास ऐसे कोई ठोस सबूत हैं तो वो पाकिस्तान को मुहैया कराए जाने चाहिए.

दोनों देशों के बीच शांति वार्ता फिर से शुरू किए जाने के बारे में शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, “इस समय अगर किसी पक्ष के अंदर झिझक नज़र आ रही है तो वो है भारत. उनके राजनीतिक हालात की वजह से राजनीतिक नेतृत्व पर बहुत सा दबाव है. जहाँ तक पाकिस्तान का सवाल है तो वो शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए बिल्कुल तैयार है.”

शांति की दरकार

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में सभी देश चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सामान्य रहें, “पाकिस्तान स्पष्ट रूप से कह चुका है कि हमारी समझ के अनुसार बातचीत के ज़रिए ही आगे बढ़ा जा सकता है. पाकिस्तान भारत के साथ शांति वार्ता में हिस्सा लेने के लिए बिल्कुल तैयार है और पाकिस्तान बातचीत की मेज़ पर बैठने के लिए तत्पर है.”

दोनों देशों के संबंधों की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में शाह महमूद ने कहा, “हमें कोई फ़िक्र नहीं है... हम एक साथ बैठकर अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और हम भारत की राय जानने के लिए भी उत्सुक हैं.”

क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव को इस्लामाबाद का दौरा करने और पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर के साथ बातचीत करने का जो न्यौता दिया है, अभी उसका कोई जवाब भारत की तरफ़ से नहीं मिला है.

क़ुरैशी ने कहा, “हमने न्यौता भेजा है और हम जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं. अभी हमें न्यौते का कोई जवाब नहीं मिला है. जवाब मिलने के बाद ही हम बातचीत का एजेंडा तैयार करेंगे और अन्य विवरण तैयार किया जाएगा.”

क़ुरैशी से यह प्रश्न भी पूछा गया कि क्या पाकिस्तान पश्चिमी देशों की सलाह पर भारतीय सीमा पर तैनात सैनिकों को हटाएगा और ज़्यादा ध्यान अफ़ग़ान सीमा के इलाक़ों में चरमपंथी गतिविधियों का सामना करने पर लगाएगा.

इस पर क़ुरैशी का कहना था, “.यह हमारा अंदरूनी मामला है, हमारी अपनी प्राथमिकताएँ हैं. हमारे सैन्य नेतृत्व को भली-भाँति जानकारी है कि देश की रणनीति क्या होनी चाहिए और हमें कब, कहाँ और किस हद तक ध्यान केंद्रित करना चाहिए. हमें अपने मामलों पर बाहर से सलाह नहीं चाहिए.”

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