'कम हो रही है अफ़ीम की खेती'

  • 2 सितंबर 2009

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती और पैदावार में ज़बरदस्त गिरावट आई है. यहाँ से आने वाली अफ़ीम से ही विश्व की 90 फ़ीसदी हेरोइन आती है.

मादक पदार्थों और आपराधिक मामलों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओडीसी) ने ये रिपोर्ट बुधवार को जारी की है.

इसमें कहा गया है कि पिछले दस सालों में अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की कीमत सबसे कम है और इसे ज़ब्त करने की घटनाएँ भी बढ़ी हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती में पिछले साल के मुकाबले में 22 फ़ीसदी की गिरावट आई है और पैदावार 10 फ़ीसदी गिरी है.

देश के 20 प्रांतों में अब अफ़ीम की खेती नहीं होती हालांकि इसका मतलब ये नहीं कि यहाँ मादक पदार्थों की तस्करी नहीं हो रही.

अफ़ीम की खेती में सबसे ज़्यादा गिरावट हेलमंद (33 फ़ीसदी गिरी) में हुई है हालांकि वर्ष 2005 के मुकाबले ये आँकड़े अब भी ज़्यादा है. 2005 से एक साल पहले हेलमंद में ब्रितानी सैनिक आए थे.

अहम बदलाव

हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि उनके मुताबिक अफ़ीम की खेती के सिलसिले में अफ़ग़ानिस्तान ने अहम बदलाव हासिल किया है.

अफ़ग़ानिस्तान में विशेष खाद्य ज़ोन बनाए गए हैं और इन्हें ब्रितानी समर्थन हासिल है जहाँ किसानों को गेहूँ की खेती करने के लिए कहा गया है. संयुक्त राष्ट्र ने इस योजना की तारीफ़ की है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम का बाज़ार गिरना शुरु हो गया है.

अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति को लेकर आमतौर पर निराशा का माहौल है. ड्रग्स और अपराध मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के प्रमुख एन्टोनियो कोस्टा ने कहा है कि ऐसे में अफ़ीम की खेती के गिरते आँकड़े एक अच्छी ख़बर है.

हालांकि एन्टोनियो कोस्टा ने आगाह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में मादक पदार्थों की बिक्री के अब भी खतरनाक नतीजे हैं- इससे अपराधियों, विद्रोही गुटों और आतंकवादियों को पैसा मिलता है, भ्रष्ट्राचार को बढ़ावा मिलता है और साथ ही लोगों का प्रशासन में भरोसा भी कम होता है.

संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि वो विकास का काम जारी रखे क्योंकि मादक पदार्थों के कारोबार से अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता को चुनौती मिल रही है.

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