अफ़ग़ान चुनाव में धाँधली के नए आरोप

बीबीसी को अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित धाँधली के नए मामलों के बारे में जानकारी मिली है.

अभी तक घोषित किए गए नतीजों के मुताबिक वर्तमान राष्ट्रपति हामिद करज़ई को स्पष्ट बढ़त मिली हुई है. शनिवार को शाम तक और नतीजे घोषित किए जाएँगे.

शिकायतों की जाँच करने वाला आयोग 600 से ज़्यादा ऐसे मामलों की जाँच कर रहा है जिनमें गंभीर धाँधली के आरोप लगे हैं. अंतिम नतीजे अभी घोषित नहीं किए जाएँगे.

अफ़ग़ान चुनाव के दो हफ़्ते बाद भी बड़े पैमाने पर धाँधली के आरोप सामने आ रहे हैं. इनमें से कुछ शिकायतों पर तो चुनाव आयोग ग़ौर भी नहीं करेगा क्योंकि मतदान के बारे में शिकायत दर्ज करवाने के लिए समयसीमा निकल चुकी है.

बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस ने बताया है कि पकटिया प्रांत में एक कबायली नेता ने उन्हें बताया है कि कैसे उन्होंने हामिद करज़ई के पक्ष में 900 मतपत्र भरवाने में मदद की.

इस व्यक्ति ने बताया है कि एक अन्य गाँव के मतदान केंद्र पर उनके रिश्तेदार ने देखा कि कैसे एक आदमी 2000 से ज़्यादा मतपत्र भर रहा था.

धाँधली

कंधार के एक ज़िले में प्रकाशित नतीजे दिखाते हैं कि दो मतदान केंद्रों में हामिद करज़ई के पक्ष में 8000 से ज़्यादा मत डाले गए हैं जबकि 31 अन्य उम्मीदवारों को एक भी मत नहीं मिला है.

स्थानीय लोगों ने धाँधली का आरोप लगाया है.वैसे सभी मुख्य उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ ये आरोप लगे हैं कि उन्होंने धाँधलेबाज़ी की है. लेकिन बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस का कहना है कि ऐसा लगता है कि प्रशासन हामिद करज़ई के पक्ष में ज़ोरों शोरों से काम कर रहा है.

इससे चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं. हामिद करज़ई के मुख्य प्रतिद्वंदी अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मिले आँकड़े से संकेत मिले हैं कि चार प्रांतों में ऐसे 28 मतदान केंद्रों से नतीजे घोषित किए गए हैं जहाँ पर्यवेक्षकों ने बताया कि ये केंद्र मतदान के दौरान बंद रहे थे.

चुनाव से कुछ दिन पहले भी बीबीसी की जाँच में अफ़ग़ानिस्तान में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में धांधली और भ्रष्टाचार के सबूत मिले थे. इस जाँच में पाया गया था कि चुनाव से पहले हज़ारों मतदाता कार्ड बिक रहे हैं और वोट ख़रीदने के लिए हज़ारों डॉलर की घूस दी जा रही है.

बीबीसी के लिए काम कर रहे एक अफ़ग़ान नागरिक ने मतदाता बनकर इन ख़बरों की पड़ताल की थी कि मतदाता कार्ड बेचे जा रहे हैं.

उन्हें दस डॉलर (पाँच सौ रुपए) प्रति मतदाता पत्र की दर से एक हज़ार मतदाता कार्ड बेचने का प्रस्ताव मिला था. कुछ और लोगों ने भी उन्हें इसी तरह का प्रस्ताव दिया.

हालांकि काबुल में मौजूद बीबीसी के इयान पैनल का कहना था कि यह जानना संभव नहीं है कि इस तरह के कितने मतदाता कार्ड बेचे जा चुके हैं.

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