'पुजारियों को सुरक्षा मिलेगी'

  • 5 सितंबर 2009
Image caption पशुपतिनाथ मंदिर में पारंपिरक तौर पर भारतीय पुजारी काम करते हैं

नेपाल में दो भारतीय पुजारियों की पिटाई के मामले में भारत ने नेपाल सरकार से बात की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्ण प्रकाश के मुताबिक नेपाल सरकार ने कहा है कि पुजारियों को सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी.

इस बीच पुजारियों ने मंदिर में सुरक्षा इंतज़ाम के बीच कामकाज शुरु कर दिया है.

नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में शुक्रवार को माओवादियों ने दो नवनियुक्त भारतीय पुजारियों की पिटाई की थी और उनके कपड़े और जनेऊ को फाड़ दिया था.

इन पुजरियों को बचाने की कोशिश कर रहे चार पुलिसकर्मी भी इस दौरान घायल हो गए. मंदिर के मुख्य द्वार के बाहर रखे दानपत्र को भी माओवादियों ने तोड़ डाला.

पुलिस ने दो संदिग्ध हमलावरों को पकड़ा है. पशुपतिनाथ मंदिर में भारतीय पुजारियों की नियुक्ति को लेकर माओवादी अपना विरोध जताते रहे हैं.

उनकी माँग है कि मंदिर में भारत के बजाय नेपाल के पुजारियों को नियुक्त करना चाहिए.

विवाद

इस साल जनवरी में माओवादियों की अगुआई वाली सरकार ने प्रतिष्ठित पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा अर्चना का काम नेपाल के ब्राह्मणों से कराने का फ़ैसला किया था. लेकिन इसका भारी विरोध हुआ था.

नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले के बावजूद तत्कालीन नेपाल सरकार ने ये नियुक्ति की थी.

इस मंदिर में परंपरागत तौर पर दक्षिण भारतीय ब्राह्मण ही पूजा पाठ कराते आए हैं. इन्हें भट्ट कहा जाता है. उनका सहयोग स्थानीय नेपाली पुजारी करते हैं, लेकिन उनका क़द ब्राह्मण पुजारियों से छोटा होता है.

नेपाली ब्राह्मणों को नियुक्त करने के फ़ैसले के विरोध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री प्रचंड ने निर्णय वापस ले लिया था.

परंपरा

पारंपरिक रूप से नेपाल नरेश ही देश के सर्वोच्च पुजारी की नियुक्ति करते थे लेकिन राजशाही की समाप्ति के बाद जब माओवादियों के नेतृत्व में सरकार बनी तो वो स्थानीय पुजारियों को इस सम्मानित पद पर नियुक्त करना चाहती थी.

ताज़ा विवाद तब हुआ है जब नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने कैबिनेट के फ़ैसले के बाद पशुपति एरिया डिवेलप्टमेंट ट्रस्ट(पीएडीटी) द्वारा नियुक्त भारतीय पुजारियों को अपनी मंज़ूरी दे दी. मंदिर का कामकाज यही ट्रस्ट देखता है.

नेपाल सरकार ने पिछले महीने तीन सदस्यीय समिति बनाई थी ताकि दक्षिण भारत से तीन पुजारियों को चुना जा सके जो पशुपतिनाथ मंदिर में काम करेंगे. मंदिर में पाँच पुजारी रहते हैं.

इस समिति ने कर्नाटक से दो पुजारियों को चुना था. पशुपति एरिया डिवेलप्टमेंट ट्रस्ट ने इन पुजारियों की अनुशंसा कर दी और नाम प्रधानमंत्री के पास भेज दिए थे. प्रधानमंत्री इस मंदिर के पैट्रन या संरक्षक हैं.

पीटीआई के मुताबिक पुलिस ने कहा है कि हमले में शामिल कुछ लोग ट्रस्ट के ही कर्मचारी थे.

पिटाई से इनकार

पशुपतिनाथ पुजारी संघर्ष समिति के संयोजक ऋषि प्रसाद शर्मा इस आरोप को खारिज करते है है की शुक्रवार रात मंदिर के भारतीय पंडितो की पिटाई की गयी.

उनका कहना है की उन्हें केवल छुआ गया ताकि वो अशुद्ध हो जाएं और मंदिर में पूजा न कर पाएँ.

इस संगठन का कहना है, "नेपाल की जनता का मानना है कि पशुपतिनाथ में भारतीय पुजारियों की नियुक्ति से विश्व में ये संदेश जा रहा है की नेपाल भारत का अंग है."

इस मामले में शर्मा के अनुसार नेपाल की राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और स्वाधीनता की बात जुड़ गई है.

संयुक्त संगर्ष समिति का कहना है कि वो एक माओवादी संगठन नहीं है, हालाँकि इसमे कुछ माओवादी शामिल हो सकते है. समिति का ये भी कहना है की मंदिर के चढ़ावे का दुरूपयोग हो रहा है और अगर नेपाल सरकार चाहे तो एक ट्रस्ट बना कर नियम बनाए.

उनकी माँग है कि पुजारियों के वेतन और मंदिर के रख रखाव के लिए धन खर्च कर बाकी राशि सरकार को दिया जाना चाहिए.

फिलहाल समिति इस मंदिर के भारतीय पुजारियों को मान्यता नहीं दे रही है क्योंकि उनका कहना है की 'ये अपवित्र हो गए है, उनके जनेऊ तोड़े जा चुके है.'

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