पाकिस्तान में चीनी की भारी क़िल्लत

  • 8 सितंबर 2009
पाकिस्तान में चीनी की कमी
Image caption पाकिस्ताम में लाहौर हाईकोर्ट ने चीनी की क़ीमत 38 रुपय प्रति किलोग्राम तय की है

पाकिस्तान इन दिनों चीनी के बड़े संकट से जूझ रहा है और बाज़ार में चीनी की आपूर्ति कम होने की वजह से इसकी क़ीमतें आसान छू रही हैं.

खुले बाज़ार में चीनी 55 से 60 रुपये किलोग्राम बिक रही है जबकि सरकारी दुकानों यानी 'युटिलिटी स्टोर्स' पर इस की क़ीमत 38 रुपये रखी गई लेकिन उपभोक्ताओँ का कहना है कि वहाँ चीनी न होने के बराबर है.

इस्लामाबाद की जिन्न सुपर मार्केट में स्थित यूटिलिटी स्टोर के सामने एक उपभोक्ता मोहम्मद अशरफ ने बीबीसी को बताया, "यहाँ चीनी नहीं है, अगर आ भी जाए न तो लंबी लाईन लगानी पड़ती है लेकिन बहुत कम चीनी आती है और जल्दी बिक जाती है."

उन्हों ने कहा, "मंहगाई की वजह से मैं घर का पूरा राशन इस स्टोर ले ख़रीदता हूँ क्योंकि सरकार दाम सस्ते होते हैं. यहाँ आम बाज़ार से भी चीनी सस्ती मिलती है."

लाहौर हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप कर चीनी की क़ीमत 40 रुपये किलो निर्धारित कर दी और सरकार को आदेश दिया कि संकट पैदा करने वाले के ख़िलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.

कोर्ट का हस्तक्षेप

जब किसानों से गन्ना 40 रुपय मन ख़रीदा जाता था तब चीनी की क़ीमत 17-18 रुपय होती थी. इस साल 40 से 80 रुपय मन गन्ना था तो चीनी क़ीमत 36 रुपय होनी चहिए कृषि विशेषज्ञ इबराहीम मुग़ल

पाकिस्तान में चीनी की हर महीने ख़पत तीन लाख टन है और पिछले साल देश में 36 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया.

कृषि विशेषज्ञ और एगरी बिज़नेस फोरम इब्राहीम मुग़ल ने इस संकट की वजह बताते हुए कहा, "इसमें सब से बड़ी ग़लती तो केंद्र सरकार ने की जब उस ने शुगर मिल्स मालिकों को कह दिया कि चीनी 49 रुपये बेचें."

उन्हों ने आगे बताया, "यह एक ग़लत क़दम था जिस के बाद ग़लतियों पर ग़लतियाँ होती गई और चीनी अब 60 रुपये बिक रही है जबकि इस की असल क़ीमत 36 रुपये होनी चाहिए."

इबराहीम ने सरकार से कहा कि जिस दाम पर किसानों से गन्ना लिया गया है उसी के हिसाब से चीनी की क़ीमत निर्धारित की जाए.

उन्हों ने कहा, "जब किसानों से गन्ना 40 रुपए मन ख़रीदा जाता था तब चीनी की क़ीमत 17-18 रुपये होती थी. इस साल 40 से 80 रुपये मन गन्ना था तो चीनी क़ीमत 36 रुपये होनी चहिए."

क़िल्लत

Image caption पाकिस्तान में चीनी की पैदावार काफ़ी कम हुई है

पिछले महीने चीनी आम बाज़ार से आचानक ग़ायब हो गई और बाद में सरकार ने निजी भंडारों पर छापे मार कर चीनी की बड़ी तादाद में बोरियाँ बरामद कीं.

चीनी 40 रुपये प्रति किलो बेचने के लाहौर उच्च न्यायालय के फ़ैसले का कई जगह विरोध हो रहा है.

शुगर डीलर्स एसोशिएशन के अध्यक्ष राणा अयूब ने बीबीसी को बताया, "हम 40 रुपये किलो चीनी नहीं बेच सकते क्योंकि हम ने मिल मालकों से मंहगे दामों चीनी ख़रीदी है और अब अगर इस क़ीमत पर चीनी बेचेंगे तो हमें करोड़ों रुपयों का नुक़सान होगा."

शुगर मिल मालकों ने भी इस क़ीमत को रद्द कर दिया है. शुगर मिल्स एसोसिएशन के सदस्य जावेद कियानी ने बताया, "हालात हमें इस स्थान पर लेआए हैं कि हम मजबूर हो गए हैं, अपने व्यापार को जारी नहीं रख सकते हैं और अगले महीने हमारे पास मज़दूरों के वेतन के लिए भी पैसे नहीं हैं."

उन्हों ने बताया कि इस साल मिल मालकों को गन्ना 120 रुपये मन मिला है और चीनी की क़ीमत भी 50 रुपये से ज़्यादा होनी चाहिए.

जानकार मानते हैं कि चीनी के संकट में मिल मालकों का हाथ है क्योंकि सरकार के साथ इन्हीं के अच्छे संबंध हैं.

संबंधित समाचार