अफ़ग़ानिस्तान में 'युद्धापराधों' की जाँच

लुई मोरेनो ओकैम्पो
Image caption ओकैम्पो ने कहा है कि वह नैटो और तालेबान दोनों ही तरफ़ से हुई घटनाओं की जाँच करेंगे.

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी के मुख्य अभियोजक लुई मोरेनो ओकैम्पो ने कहा है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में संभावित युद्धापराधों के बारे में जानकारी एकत्र कर रहे हैं.

उन्होंने कहा है कि वो इन दावों की जाँच-पड़ताल करेंगे कि यु्द्धापराध नैटो और तालेबान चरमपंथियों दोनों ही तरफ़ से हुए हैं.

लुई मोरेनो ओकैम्पो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को अफ़ग़ानिस्तान में ऐसे हमलों के बारे में अनेक सूत्रों से शिकायतें और आरोप प्राप्त हुए हैं जिनमें निर्दोष लोग मारे जाते हैं.

लेकिन न्यायालय इस मामले में तभी आगे बढ़ेगा जब अफ़ग़ान सरकार या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उससे औपचारिक रूप से इन आरोपों की जाँच करने का अनुरोध करेगा.

अफ़ग़ानिस्तान ने भी उस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके ज़रिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का गठन किया गया है.

संधि में व्यवस्था है कि यह न्यायालय उस स्थिति में दख़ल दे सकता है जब कोई देश नरसंहार, मानवता के ख़िलाफ़ अपराध या युद्धापराधों के मामले में या तो न्याय दिलाने के लिए अनिच्छुक हैं या फिर वो ऐसा कर पाने में अक्षम हैं.

अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन पर विदेशी सेनाओं या अफ़ग़ान नागरिकों के ज़रिए अगर कोई भी युद्धापराध किए जाते हैं तो यह न्यायालय उनकी जाँच कर सकता है.

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने वर्ष 2002 में काम करना शुरू किया था और यह विश्व का पहला स्थायी युद्धापराध ट्राइब्यूनल है.

खुलापन

लुई मोरेनो ओकैम्पो ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में युद्धापराध होने के आरोपों की प्रारंभिक जाँच बहुत जटिल थी और इसमें काफ़ी समय लगा है क्योंकि जानकारी एकत्र करने में बहुत मुश्किलें आईं.

Image caption ऐसे आरोप हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में नैटो हमलों में बहुत से आम नागरिक भी मारे गए हैं

लेकिन उन्होंने कहा कि देश में सक्रिय ग़ैर सरकारी संगठनों ने युद्धापराधों के बारे में जानकारी और सबूत मुहैया कराए हैं.

लुई मोरेने ओकैम्पो ने कहा कि इस बारे में मानवाधिकार संगठनों और अफ़ग़ान सरकार से जानकारी माँगी गई है और अगर विदेशी सरकारों से भी अगर कोई जानकारी मिलेगी तो उसका भी स्वागत किया जाएगा.

उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ख़ासतौर से किन घटनाओं की जाँच-पड़ताल कर रहा है. उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता कि किसी पर इस मामले में आरोप निर्धारित किए जाएंगे या नहीं.

निर्णय में ग़लती

लुई मोरेनो ओकैम्पो ने कहा, "इससे पहले कि हम जाँच शुरू करें, हमारे दफ़्तर का यह कर्तव्य बनता है कि हम ये शुरूआती जाँच-पड़ताल करें कि क्या जाँच करना ज़रूरी भी है या नहीं."

"फ़िलहाल हम जिन घटनाओं या आरोपों का आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं उनमें भीषण हमलों के आरोप भी शामिल हैं. साथ ही ऐसे हमलों के आरोप जो भूल से हुए बताए जाते हैं और ऐसी घटनाओं में क्या उपयुक्त कार्रवाई हो सकती है और कब किसी घटना को प्रताड़ना का नाम दिया जा सकता है."

Image caption अमरीका का कहना रहा है कि उसके सैनिक किसी अंतरराष्ट्रीय संधि के दायरे में नहीं आते

उन्होंने कहा कि अगर अफ़ग़ानिस्तान सरकार इन आरोपों की भरोसेमंद जाँच शुरू कर देती है तो अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय इस मामले में कोई क़दम नहीं उठाएगा.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने नैटो सेनाओं के उस हमले को पिछले सप्ताह "निर्णय की भारी भूल" क़रार दिया था जिसमें अनेक आम लोग मारे गए थे.

अफ़ग़ान अधिकारी लगातार शिकायत करते आए हैं कि नैटो हमलों की वजह से बड़ी संख्या में आम और निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं.

जबकि नैटो ने अफ़ग़ानिस्तान में बहुत सी हिंसक गतिविधियों के लिए तालेबान और अल क़ायदा को ज़िम्मेदार ठहराया है जिनमें स्कूलों पर भी हमले बताए गए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में सबसे ज़्यादा सैनिक अमरीका के हैं और वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का सदस्य देश नहीं है. अमरीकी अधिकारियों की लंबे समय से यह दलील रही है कि अमरीकी सैनिकों पर अमरीकी क़ानून ही लागू होना चाहिए, उन पर कोई अंतरराष्ट्रीय संधि लागू नहीं होनी चाहिए.

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