भारत-बांग्लादेश के बीच अहम समझौते

  • 11 सितंबर 2009
कृष्णा और दीपू मोनी
Image caption दोनों देशों के बीच हुए समझौते कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं

भारत और बांग्लादेश ने सज़ायाफ़ता मुजरिमों की अदला बदली समेत कई अहम मुद्दों पर समझौता किया है.

दोनों देशों के बीच सीमा पर बाज़ार शुरू करने और रेल तथा जल मार्ग के ज़रिए व्यापार करने के लिए माल लाने ले जाने की अनुमति पर भी सहमति हुई है.

बांग्लादेश की विदेश मंत्री दिपू मोनी की चार दिनों की भारत यात्रा के दौरान ये फ़ैसले किए गए हैं.

अपनी यात्रा के दौरान दिपू मोनी ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री एस एम कृष्णा के अलावा वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और जल संसाधन मंत्री पवन बंसल से भी मुलाक़ात की.

यात्रा के अंतिम दिन वृहस्पतिवार को दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए दिपू मोनी ने इसकी जानकारी दी.

दोनो देशो के बीच जारी साझा ब्यान में व्यापार, ऊर्जा और अपराधियों के अदला बदली समेत कई अन्य मामलों मे रज़ामंदी की बात कही गई है.

दोनों देशों ने तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे पर जल्द से जल्द समझौते की ज़रूरत पर बल दिया है.

समझौते के तहत भारत अब आशुगंज बंदरगाह का इस्तेमाल कर सकेगा, बाग्लादेश इसके लिए तैयार हो गया है.

इस बंदरगाह के ज़रिए भारत त्रिपुरा मे पालातना पावर प्रोजेक्ट के लिए सामानों को आसानी से ले जा सकेगा.

साथ ही भारत ने बांग्लादेश को नेपाल और भूटान तक अपनी धरती से होकर व्यापार के लिए सामान लाने ले जाने की अनुमति दे दी है.

भारत प्राथमिकता के आधार पर बांग्लादेश को 100 मेगावाट बिजली देगा.

इसके अलावा बांग्लादेश-मेघालय सीमा पर दोनों देशों ने सीमा बाज़ार शुरू करने का फ़ैसला किया है.

एक महत्वपूर्ण फ़ैसले मे दोनो देशों ने सज़ायाफ़ता मुजरीमों की अदला बदली पर भी सहमति बना ली है.

इस फ़ैसले से बागंलादेश के जेलों मे बंद पूर्वोत्तर में सक्रिय चरमपंथी संगठनों के सदस्यों को सौंपने के लिए भारत बांग्लादेश पर दबाव डाल सकेगा.

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