धाँधली के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया

चुनाव अभियान के दौरान अफ़ग़ानिस्तान
Image caption यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों के आरोप से करज़ई का खेमा काफ़ी नाराज़ है

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के चुनाव अभियान से जुड़े दल ने चुनाव में धाँधली के यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों के दावों को 'ग़ैर-ज़िम्मेदाराना' बताया है.

इस बीच शुरुआती नतीजों की अंतिम कड़ी में बताया गया है कि करज़ई को 54.6 प्रतिशत वोट मिले. ये नतीजे अभी तक आधिकारिक नहीं हुए हैं.

इससे पहले यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों ने कहा था कि कुल मतदान का लगभग एक चौथाई यानी 15 लाख मत संदेह के घेरे में हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव के बाद की इस स्थिति से कैसे निबटा जाए इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अभी मतभेद ही दिख रहा है.

इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने माना था कि उनके एक सहायक चुनाव से जुड़े आपसी मतभेद के बाद देश छोड़कर चले गए हैं.

मगर नॉर्वे के राजदूत काइ ईडे ने इन ख़बरों से इनकार किया कि उन्होंने अपने अमरीकी सहायक पीटर गैलब्रेथ को देश छोड़ने के लिए कहा था.

बुधवार को घोषित हुए नतीजों का मतलब है कि मतगणना समाप्त हो गई है मगर विजेता की आधिकारिक घोषणा अभी कुछ और हफ़्तों तक नहीं होने की संभावना है.

पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुला दूसरे स्थान पर रहे हैं और उन्हें 27.8 प्रतिशत मत हासिल हुए. कुल मतदान 38.7 प्रतिशत रहा.

तीखी प्रतिक्रिया

उधर यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों के बयान पर करज़ई की टीम ने काफ़ी तीखी प्रतिक्रिया दी.

उनके चुनाव अभियान कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, "संदिग्ध मतों के बारे में यूरोपीय चुनाव पर्यवेक्षक आयोग के प्रमुख और उप प्रमुख की ओर से जिन आँकड़ों की घोषणा हुई है वो ग़ैर-ज़िम्मेदाराना और अफ़ग़ानिस्तान के संविधान से विरोधाभासी है."

उनका कहना था कि पर्यवेक्षकों को अपनी सूचना स्वतंत्र चुनाव आयोग और चुनाव में शिकायत से जुड़े आयोग को देनी चाहिए.

बयान के मुताबिक़, "हम मानते हैं कि मौजूदा प्रक्रिया से एक वैधानिक नतीजा तभी मिल सकता है जब वैधानिक संस्थाओं को प्रक्रिया पूरी करने दिया जाए और उनके मामलों में दख़लंदाज़ी बंद की जाए."

साथ ही अभियान कार्यालय के अनुसार, "अगर कोई चमत्कार नहीं हो जाता तो विजयी तो हम ही हैं."

यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों के उप प्रमुख दिमित्रा इयोनू का कहना था कि जो संदिग्ध मत हैं उनमें से 11 लाख मत करज़ई के पक्ष में और तीन लाख अब्दुल्ला अब्दुल्ला के पक्ष में हैं.

इयोनू के अनुसार, "चुनाव केंद्रों के स्तर पर व्यापक धाँधली हो रही थी और जब ऐसी मतपेटियाँ मतगणना स्थलों पर पहुँचीं तो उन्हें अलग करके उनकी छानबीन करने की बजाए उन्हें एक अच्छे नतीजे की तरह स्वीकार कर लिया गया."

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