'मुंबई के अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मदद करे भारत'

  • 19 सितंबर 2009
रहमान मलिक

पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने शनिवार को कहा है कि मुंबई हमलों के सिलसिले में अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने के लिए भारत से उन्हें मदद की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा कि भारत को चाहिए कि वो इस सिलसिले में कुछ और साक्ष्य और अभी तक भेजी गई जानकारी का विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराए ताकि अदालत में मुंबई के अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मामला कमज़ोर न पड़े.

मलिक का ताज़ा बयान ऐसे वक़्त में आया है जब इस्लामाबाद की एक आतंकवाद निरोधक अदालत में मुंबई बम हमलों के सात संदिग्धों के खिलाफ़ चल रहे मामले को 26 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.

रहमान मलिक ने शनिवार की शाम पत्रकारों को संबोधित करते हुए जानकारी दी कि भारत में पिछले वर्ष नवंबर, 2008 के मुंबई हमलों के सिलसिले में सात अभियुक्तों को हिरासत में ले लिया गया है.

उन्होंने बताया कि अभी तक 101 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं. 126 चीज़ों को बरामद किया गया है. कई जगहों को पहचाना गया है जहाँ अभियुक्त छिपते थे. हमले से पहले समुद्री सफ़र के लिए इस्तेमाल की गई नाव बरामद कर ली गई है. बैंक खातों की जानकारी जुटा ली गई है और ऐसे तमाम सबूत अदालत के सामने पेश कर दिए गए हैं.

पर उन्होंने कहा कि अदालत को अब कुछ मज़बूत और पुख़्ता सबूत देने का वक़्त आ गया है. अब बारी भारत सरकार की है कि वो इस मामले में और जानकारी और अभी तक दी गई चीज़ों के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाए ताकि अदालत में पाकिस्तान की सरकार मज़बूती से अपना पक्ष रख सके.

रहमान मलिक ने कहा, "भारत से हमें फॉ़रेंसिक रिपोर्ट चाहिए. साथ ही मोबाइल और सेट फ़ोन से संबंधित विस्तृत और ठोस जानकारी अदालत में पेश करने के लिए चाहिए. हम भारत की अदालती कार्रवाई में मदद के लिए तैयार हैं पर चाहते हैं कि भारत हमारी मदद करे. भारत से हो रही बयानबाज़ियों के बावजूद हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं."

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान जिस रफ़्तार से काम कर रहा है, उतना किसी और के लिए संभव नहीं है. साथ ही वो यह कहने से भी नहीं चूके कि पाकिस्तान पर जो नहीं हुआ है, उसका इल्ज़ाम ही लग रहा है, जो हुआ है उसके लिए प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है.

अदालती कार्यवाही स्थगित

उधर इस्लामाबाद में आतंकवाद निरोधक अदालत में इस मामले की सुनवाई अब 26 सितंबर तक के लिए टल गई है. अदालत मामले की सुनवाई बंद कमरे में कर रही है इसलिए अदालत में क्या हो रहा है इसकी जानकारी बाहर नहीं आ रही.

पर भारत का कहना है कि पाकिस्तान इस मामले को उतनी गंभीरता से आगे नहीं ले जा रहा जैसे उसे ले जाना चाहिए. पाकिस्तान के अडियाला जेल में लश्कर ए तैय्यबा के ज़किउर रहमान लखवी और छह अन्य के खिलाफ़ मामले चल रहे है.

पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने भी गुरुवार को भारत के पाकिस्तान पर गंभीर न होने के आरोपों पर नाराज़गी व्यक्त की थी और कहा था कि पाकिस्तान दबाव में नहीं क़ानून के हिसाब से काम कर रहा है.

इनमें से पांच, लखवी, ज़रार शाह, अबुल अल क़ामा, हमद अमीन सादिक और शाहिद जमील रियाज़ पर मुंबई में हुए हमले के प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता देने, रहने खाने का इंतज़ाम करने और साजो सामान देने के आरोप है. पर जमील अहमद और यूनुस अंजुम को किन आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया है ये स्पष्ट नहीं है.

वही भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने जमात उद दावा प्रमुख हाफिज़ सईद की गिरफ्तारी के आदेशों पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि पाकिस्तान 26 नवंबर के मुम्बई हमलों के मामले में भी गंभीर नहीं है और कार्रवाई तो दूर अभी तक एक भी गवाह से पूछताछ तक नहीं की गई.

उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की मिस्र के शर्म अल शेख की मुलाक़ात के ठीक पहले भी हाफिज़ सईद की गिरफ्तारी हुई थी और बाद में उन्हें अदालत ने रिहा कर दिया था.

भारत के विश्लेषको का कहना है कि दोनों देशों के नेताओं के बीच उच्च स्तरीय बातचीत के ठीक पहले पाकिस्तान कुछ करता हुआ दिखाई देने के लिए खानापूर्ति कर रहा है और भारत भी मामले की गंभीरता जताने की कोशिश ये कहकर करता है कि जबतक पाकिस्तान कुछ पुख्ता नहीं करता, बात नहीं हो पाएगी. विदेश सचिव निरुपमा राव ने भी शनिवार को कुछ ऐसे ही संकेत दिए.

यानी दोनों देशों के बीच रिश्तों की डोर उतनी ही कमज़ोर दिखाई दे रही है जितनी मुंबई हमलों के बाद नज़र आ रही थी.

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