टूटा नहीं है चरमपंथियों का हौसला

  • 10 अक्तूबर 2009
पाकिस्तान
Image caption पाकिस्तान में चरमपंथी हमले बदस्तूर जारी हैं

पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय पर हमला कर चरमपंथियों ने एक बार फिर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दिखाया है और सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अब भी ताक़तवर हैं.

जानकार इसे सेना पर अब तक का सबसे बड़ा हमला मान रहे हैं क्योंकि हमलावर मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर पहुँचे और अंदर जाने की कोशिश की.

शुक्रवार को पेशवार में आत्मघाती हमले के बाद इस्लामाबाद और रावलपिंडी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और इस बावजूद भी हमलावर मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर पहुँचने में सफल रहे.

सेना पर सीधे तौर पर इस प्रकार के हमले पहले भी हो चुके हैं. दिसंबर 2003 में पूर्व राष्ट्रपति और उस वक्त के सेनाध्यक्ष जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ पर आत्मघाती हमला किया गया जिसमें वे तो बच गए लेकिन 13 लोग मारे गए थे.

निशाना

जून 2004 में कराची में एक वरिष्ठ सैनिक कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल अहसन सलीम को निशाना बनाया गया और हमला किया गया. इस हमले सैनिक कमांडर तो बच गए लेकिन 11 लोग मारे गए थे. सेना मुख्यालय का यह गेट रावलपिंड की मॉल रोड पर स्थित है और इसके बिल्कुल सामने सदर बाज़ार का भीड़भाड़ वाला इलाक़ा है.

प्रत्याक्षदर्शियों ने अनुसार हमलावरों ने सैनिकों की वर्दी पहन रखी थी और पहली चौकी पर रोके जाने के बाद उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी जिससे चौकी पर मौजूद चार सुरक्षाकर्मी मारे गए.

हमलावरों ने दूसरी चौकी की ओर बढ़ने की कोशिश लेकिन वहाँ पहुँच नहीं सके और सुरक्षाकर्मियों ने फायरिंग शुरू कर दी.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने बीबीसी को बताया कि गोलीबारी का सिलसिला क़रीब 40 मिनट तक चला और फिर स्थिति नियंत्रण में कर ली गई. इस अभियान में सेना ने हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया.

इस घटना को सेना मुख्यालय पर नाकाम हमला बताया जा रहा है लेकिन देखा जाए तो यह सेना को चरमपंथियों की ओर से बड़ी चुनौती है.

सरकार कई बार यह चुकी है कि उसने स्वात और अन्य अशांत इलाक़ों में अभियान चला कर चरमपंथियों की कमर तोड़ दी है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता के मुताबिक़ इस हमले की ज़िम्मेदारी तालेबान ने स्वीकार कर ली है.

अभियान

स्वात और अन्य इलाक़ों में किए गए अभियान में सरकार को कुछ सफलताएँ ज़रूर मिली हैं, इसमें वरिष्ठ तालेबान कमांडर भी मारे गए और गिरफ़्तार किए गए.

Image caption वज़ीरिस्तान में सेना की कार्रवाई चल रही है

लेकिन पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यालय पर हमला किया गया और शुक्रवार को पेशावर में भी आत्मघाती हमले में कई लोग हताहत हुए.

इस्लामाबाद, पेशावर और अब सेना मुख्यालय पर हुए हमले से पता चलता है कि सरकार ने अब भी तालेबान और कथित चरमपंथियों की कमर नहीं तोड़ी है और उन्होंने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी भी समय और किसी स्थान पर हमला कर सकते हैं.

पाकिस्तान सरकार कई दिनों से कह रही है कि वह स्वात और उसके आसपास के इलाक़ों के बाद अब अशांत क़बायली इलाक़े वज़ीरिस्तान में सैनिक अभियान शुरू करेगी.

तालेबान के नए प्रमुख हक़ीमुल्लाह महसूद ने कुछ दिन पहले कहा था कि सेना को वज़ीरिस्तान में अभियान काफ़ी मंहगा पड़ेगा.

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