सईद के ख़िलाफ़ मुक़दमे ख़ारिज

हाफ़िज़ सईद
Image caption हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ आतंकवाद निरोधक क़ानून के तहत कार्रवाई की गई थी

पाकिस्तान की एक अदालत ने लश्करे तैबा के पूर्व प्रमुख और कट्टरपंथी इस्लामी नेता हाफिज़ सईद के ख़िलाफ़ दायर किए गए दो मुक़दमों को ख़ारिज कर दिया है. ये मुक़दमे तीन सप्ताह पहले दर्ज किए गए थे.

लाहौर हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों, जस्टिस आसिफ सईद खोसा और जस्टिस शैख़ फख़रुहसन ने हाफिज़ सईद की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए उन के ख़िलाफ दायर मुक़दमे ख़ारिज करने के आदेश दिए.

हाफिज़ सईद के ख़िलाफ पंजाब के फ़ैसलाबाद शहर में आतंकवाद निरोधक क़ानून के तहत सितंबर के मध्य में दो मुक़दमे दर्ज किए थे.

हाफिज़ सईद पर आरोप था कि उन्होंने इस साल अगस्त में जेहाद से संबंधित भड़काऊ भाषण दिए थे.

मुक़दमों में आरोप लगाया गया था कि हाफिज़ सईद ने एक प्रतिबंधित संगठन का प्रमुख होने के बावजूद भड़काऊ भाषण दिया, जेहाद के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया और चंदा माँगकर क़ानून का उल्लंघन किया है.

अपील

हाफिज़ सईद ने इन मुक़दमों के ख़िलाफ लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.

उनके वकील ए के डोगर ने कहा कि फ़ैसलाबाद में मुक़दमे ग़लत दर्ज किए गए और हाफिज़ सईद की संस्था न तो प्रतिबंधित है और न ही उनका भाषण क़ानून के ख़िलाफ है.

उन्होंने अदालत को बताया कि इन मुक़दमों में आतंकवाद निरोधक क़ानून की जो धाराएँ लगाई गई हैं वह सही नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि दोनों मुक़दमे 15 दिनों की देरी के बाद दर्ज किए गए जिससे ज़ाहिर होता है कि ये मुक़दमे किसी ख़ास नीयत से किए गए थे.

उन्होंने अदालत ने आग्रह किया कि दोनों मुक़दमों को ख़ारिज किया जाए.

अदालत ने पंजाब सरकार को आदेश दिए कि हाफिज़ सईद के ख़िलाफ दायर दोनों मुक़दमे ख़ारिज किए जाएँ.

ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने हाफिज़ सईद पर मुबंई हमलों का आरोप लगया है और पाकिस्तान सरकार ने उनके ख़िलाफ कार्रवाई की बार-बार माँग कर रही है.

पाकिस्तान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के कहने पर जमात-उल-दावा पर प्रतिबंध लगाया था.

इसके बाद पंजाब सरकार ने हाफिज़ सईद को छह महीने तक नज़रबंद किया लेकिन जून में अदालत के आदेश पर उनकी नज़रबंदी ख़त्म कर दी गई.

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