मनमोहन से मिलना चाहते हैं चीनी प्रधानमंत्री

चीन से भारत के प्रति विरोधाभासी संकेतों का आना बदस्तूर जारी है.

बुधवार को एक तरफ तो चीनी प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ ने भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने की उत्सुकता जताई दूसरी तरफ उनके देश ने भारतीय विरोध के बावजूद पकिस्तान प्रशासित कश्मीर में निवेश की बात की है.

चीनी प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ ने भारत के केंद्रीय तेलमंत्री मुरली देवड़ा से कहा है कि वो भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने के उत्सुक हैं.

मुरली देवड़ा शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के लिए चीन पहुँचे थे जहाँ चीन के प्रधानमंत्री ने अपनी यह इच्छा ज़ाहिर करते हुए उनसे कहा कि वो भारतीय प्रधानमंत्री तक उनका यह संदेश पहुंचा दें.

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगले महीने थाइलैंड में होने वाली आसियान की बैठक में पहुँचने की संभावना है.

तीखे तेवर भी

पर दूसरी ओर चीन की ओर से लगातार ऐसे बयानों का क्रम जारी है जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर विरोधाभास की स्थिति पैदा होती है.

जहाँ एक तरफ चीनी प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने की उत्सुकता जताई है वहीं दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति हु जिंताओ ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में सिंचाई परियोजनाओं में निवेश करने की इच्छा जताई.

बीजिंग में मौजूद पत्रकार सैबल दासगुप्ता के अनुसार निवेश प्रस्ताव का अर्थ हुआ कि चीन विवादित कश्मीर में पकिस्तान की प्रभुसत्ता को स्वीकारता है.

भारत ने इस बात पर सख्त आपत्ति जताई है.

दासगुप्ता ने कहा "दोनों देशों के बीच एक कूटनीतिक खेल जारी है और चीन भारत को उकसाना चाहता है."

Image caption पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के संबंधों में खटास बढ़ी है

संबंधों में तनाव

उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ समय में थोड़ा तनाव देखा जा रहा है.

कुछ समय पहले मीडिया में ख़बरें आई थीं कि चीन की सेना ने सीमा से लगे कुछ इलाक़ों में कब्ज़ा करने की कोशिश की. हालांकि दोनों पक्षों ने इसका खंडन किया था.

इसके बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय प्रधानमंत्री की चुनावी यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अरुणाचल विवादित इलाक़ा है और भारतीय प्रधानमंत्री की विवादित इलाक़े में चुनाव प्रचार करना सही नहीं है.

इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी और कहा था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है और भारत के प्रधानमंत्री जब चाहें, वहाँ जा सकते हैं.

इतना ही नहीं पिछले दिनों चीन ने भारत अधिकृत कश्मीर के नागरिकों को पासपोर्ट की बजाय अलग पन्ने पर चीन का वीज़ा देना भी शुरु किया है और इसे लेकर भी गहरा विवाद हो चुका है.

अब चीन की ओर से पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में निवेश की बात सामने आई है जिसपर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है.

बुधवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में आशा जताई है की चीन अपने और भारत के रिश्तों “पर दीर्घकालिक दृष्टि से काम लेगा और अवैध रूप से कश्मीर पर किए गए कब्जे वाली जगह पर अपनी गतिविधियों को रोकेगा.”

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