'अफ़ग़ानिस्तान में और सेना अभी नहीं'

  • 19 अक्तूबर 2009
अमरीकी सैनिक
Image caption अमरीका ने इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में 40 हज़ार और सैनिक भेजने की घोषणा की थी.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के निकटस्थ सहयोगी का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान की नई सरकार के रवैये को देख कर ही वहां अतिरिक्त सैनिक भेजने का फ़ैसला होगा.

व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ रैम इमैनुअल ने कहा है कि जब तक अमरीका को ये भरोसा नही हो जाता की वहां की नई सरकार 'सच्ची सहयोगी' है तब तक वहां और सैनिक भेजने पर कोई फ़ैसला नही होगा.

उन्होंने सीएनएन टीवी को बताया की नई सरकार का अच्छे से विश्लेषण से पहले एसा फ़ैसला लापरवाही होगी.

अमरीका फ़िलहाल अफ़गानिस्तान मे 40 हज़ार और सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है.

अफ़गानिस्तान मे हुए चुनाव मे धांधली के आरोपों की जांच के परिणाम अगले कुछ दिन मे संभावित हैं.

ऐसा माना जा रहा है की इस जांच से पर्दाफ़ाश होगा की वर्तमान राष्ट्रपति को चुनाव मे 50 प्रतिशत वोट नही मिले थे, जो दूसरे चरण के मतदान को टालने के लिए ज़रुरी है.

मौजूदा राष्ट्रपति हामिद करज़ई का दावा है की 20 अगस्त को हुए चुनाव मे वो जीते हैं लेकिन यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षक कहते हैं की उस चुनाव मे पड़ी हर चौथी वोट संदिग्ध है.

सीएनएन से बात करते हुए इमैनुअल ने कहा की अमरीका पहले आश्वस्त होना चहाता है की वंहा की नई सरकार उसका सच्चा सहयोगी बनने की क्षमता रखती है और देश चला सकती है.

उनका कहना था की बिना गहरे विश्लेषण के वहां अमरीकी सैनिकों की संख्या के बारे मे कोई फ़ैसला लेना लापरवाही होगी, इससे पहले ये तय करना होगा की उसका अफ़गान सहयोगी उस जगह को भरने मे सक्षम है जो अमरिकी सैनिक ख़ाली करेगें और अफ़गानिस्तान को चलाने मे सच्चे सहयोगी साबित होगें.

अगस्त में हुए चुनाव परिणामों में करज़ई को 55 प्रतिशत दिए गए और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी अब्दुल्ला अब्दुल्ला को 28 प्रतिशत मत मिले. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के चुनाव शिकायत आयोग ने धांधली की शिकायतों के बाद चुनाम परिणामों की जांच शुरु की.

ये आयोग अपनी रिपोर्ट स्वतंत्र चुनाव आयोग को देगा जिसके बाद हो सकता है की आयोग अपनी अंतिम सूचि मे सुधार करे और करज़ई को मिलने वाला वोट प्रतिशत 50 प्रतिशत से कम हो जाए.

अधिकारियों का कहना है की करज़ई इस बात से ख़फ़ा है की उन्हे दूसरे चरण के मतदान मे जाना पड़ेगा.

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