वज़ीरिस्तान में पाक सेना का अभियान

वज़ीरिस्तान में पाक सेना
Image caption वज़ीरिस्तान का इलाक़ा काफ़ी दुर्गम है. यहाँ तालेबान के कई बड़े लड़ाके छिपे हुए कहे जाते हैं

पाकिस्तानी सेना ने वज़ीरिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान छेड़ दिया है. यह इलाक़ा अशांत क्षेत्र रहा है. इस इलाक़े के बारे में और जानकारियाँ:

वज़ीरिस्तान कहाँ है और इसकी भौगोलिक स्थिति क्या है?

वज़ीरिस्तान उत्तर पश्चिम पाकिस्तान में एक पहाड़ी इलाका है जो अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है. वज़ीरिस्तान 'फाटा' का हिस्सा है और कुछ हद तक स्वायत्त इलाका है जहाँ केंद्रीय सरकार का सीमित शासन एक राजनैतिक दूत के ज़रिए होता है. प्रशासनिक कारणों के चलते वज़ीरिस्तान को दो भागों में बाँटा गया है उत्तर वज़ीरिस्तान और दक्षिण वज़ीरिस्तान. यहाँ की प्राकृतिक परिस्थियों के कारण गुज़ारा करना बहुत मुश्किल है. यहाँ सर्दी बहुत ही तेज़ होती है जिससे इस इलाक़े में पहुँचना लगभग असंभव हो जाता है. यहाँ का कबायली समाज बहुत ही रूढ़ीवादी है और यहाँ के लोग जांबाज़ योद्धा माने जाते है. उत्तर वज़ीरिस्तान में वज़ीर कबीले का दबदबा है. दक्षिण वज़ीरिस्तान में भी एक तिहाई लोग वज़ीर कबीले के है. बाकी दो तिहाई महसूद हैं

वज़ीरिस्तान को निशाना क्यों बनाया गया है ?

अमरीकी अधिकारियों के अनुसार दक्षिण वज़ीरिस्तान और उसके आस पास के इलाके दुनिया की सबसे ख़तरनाक जगह है. कई प्रेक्षक मानते है की दुनिया के कई ऐसे चरमपंथी जिनकी पड़ताल की जा रही है, जिनमें ओसामा बिन लादेन भी शामिल है, इसी इलाके में हैं. तालेबान के पूर्व अध्यक्ष बैतुल्लाह महसूद जो अमरीकी ड्रोन हमले में अगस्त 2009 में मारे गए थे वो भी यहीं के रहने वाले थे. उनके बाद पाकिस्तानी तालेबान के प्रमुख हकीमुल्लाह महसूद भी इसी इलाके के है. उत्तर और दक्षिण वज़ीरिस्तान एक बहुत ही ख़तरनाक चरमपंथी इलाका है जहाँ से चरमपंथियों ने उत्तर पश्चिम पाकिस्तान और पूर्वी अफगानिस्तान में कई हमले किए हैं.

अमरीका ने पाकिस्तान की सरकार पर खासा दबाव डाला हुआ है की वो यहाँ पर चरमपंथ से निपटे. विश्लेषकों के अनुसार अल क़ायदा से जुड़े हुए उज़बेकिस्तान और अरब देशों से आए चरमपंथियों को इस इलाके से निकलना भी एक अहम् लक्ष्य है

अब तक क्या हुआ है?

पाकिस्तानी सेना ने वर्ष 2004 से दक्षिण वज़ीरिस्तान के वाना क्षेत्र में एक मुख्यालय बना रखा है. लेकिन 2009 से भारी मात्रा में सैनिक, वज़ीरिस्तान की बाहरी सीमा पर इकट्ठा हो रहे हैं. पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों ने तालेबान चरमपंथियों के खिलाफ हवाई हमले किए हैं और कुछ जगहों पर तोपों का भी इस्तेमाल हुआ है. लेकिन अभी तक सेना ने कहा है की उन्होंने ये हमले तालेबान को कमज़ोर करने के लिए किए हैं.

स्वात घाटी में सेना का हाल ही में हुआ अभियान इससे अलग संकेत देता है जहाँ सेना ने तीन महीने के लिए ज़मीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू की और तालेबान लड़ाकूओं को वहां से निकालने में काफी हद तक सफल रहे.

कई महीनों से लोग वज़ीरिस्तान से भाग रहे हैं इन आशंकाओं के चलते की वहां लड़ाई होने वाली है

अमरीका भी वज़ीरिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ हमलों में शामिल है जहाँ कथित ड्रोन हमलों में कई प्रमुख तालेबान चरमपंथी मारे गए है

ऐसे ही एक हमले में तालेबान प्रमुख बैतुल्लाह महसूद भी दक्षिण वज़ीरिस्तान में मारे गए थे.

दक्षिण वज़ीरिस्तान में अभियान चलाने में क्या चुनौतियाँ है?

वहां का पहाड़ी इलाक़ा सेना के लिए एक बड़ी चुनौती माना जाता है. घाटियों, नहरों और ऊंचाइयों पर पहाडों में बनी पगडंडियों के कारण इन इलाकों में पहुँचना भी मुश्किल होता है और चरमपंथियों को छिपने की जगह भी मिल जाती है. इस इलाके के बारे में जानकारी होना बहुत ज़रूरी है और इस मामले में चरमपंथियों को फायदा है.

लेकिन इस्लामाबाद स्थित बीबीसी के एम इलयास खान का कहना है की स्वात घाटी में जहाँ हाल ही में सेना ने तालेबान के साथ लड़ाई की थी, दक्षिण वज़ीरिस्तान से ज्यादा कठिन इलाका था क्योंकि वहां ज़्यादा घने जंगल है.

मौसम की भी भूमिका रहेगी. ये अनुमान लगाया जा रहा है कि दिसंबर महीने में बर्फ़बारी से इस इलाके के कई हिस्से पूरी तरह बर्फ से ढक जाएँगे खासकर मकीन इलाका जिसे महसूदों का गढ़ माना जाता है. इससे सेना और चरमपंथियों दोनों को दिक्कत हो सकती है लेकिन ठंड ने सेना को अभियान शुरू करने से नहीं रोका है.

समीक्षकों के अनुसार वज़ीर और महसूद कबीले पैदाइशी योद्धा होते है जो अंतिम समय तक लड़ने को तैयार रहते हैं और ये मानसिकता भी इस अभियान का अंजाम तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

पाकिस्तानी सेना के लगभग 30,000 सैनिक दो भागों में वज़ीरिस्तान के नज़दीक तैनात कर दिए गए है. इसके अलावा फ्रंटियर कोर- जो की कबायली इलाकों से चुने गए लोगों का अर्धसैनिक बल है - भी सेना की इस अभियान में मदद कर सकता है.

इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल है की वहां कितने चरमपंथी है. एक सेना प्रवक्ता के अनुसार वहां दस से बीस हज़ार लड़ाकू हो सकते है

दक्षिण वज़ीरिस्तान में हकीमुल्ला महसूद एक ऐसे गुट का नेतृत्व करते है जिसे सबसे बड़ा चरमपंथी बल माना जाता है. आशंका है की इस गुट में 15000 शस्त्रधारी लड़ाकू हैं लेकिन कट्टर लड़ाकूओं की संख्या इससे बहुत कम है

अफगानिस्तान से सटा हुआ पाश्चिमी इलाका अहमदज़इ वज़ीर कबीलों का इलाका है. संभावना है की वर्तमान अभियान केवल महसूद इलाके तक ही सीमित होगा .

प्रेक्षकों के अनुसार दक्षिण वज़ीरिस्तान में 500-5000 के बीच उज़बेक लड़ाकू है.

वहां पर क्या रणनीति अपनाई जाएगी ?

सेना ने कहा है की उन्होंने अपने सैनिक और हथियार वगैरह उत्तर पूरब और पश्चिम से इलाके में भेजे है.

ऐसा लग रहा है की सेना महसूदों का गढ़ मकीन की ओर बढ़ रही है. अगर सेना पूरी ताकत के साथ जाती है तो संभावना है की चरमपंथी इलाके में कब्ज़ा बनाए रखने की कोशिश नहीं करेंगे बल्कि इधर उधर फ़ैल जायेंगे.

लेकिन अभी तक ख़बरें है की वह वहां पर सेना को रोकने की कोशिश कर रहे है. चरमपंथियों ने एक अति आवश्यक दूरसंचार टावर को नष्ट कर दिया है.

विश्लेषकों के अनुसार, ये लगभग तय है की चरमपंथी छापामार युद्घ की रणनीति अपनाएंगे. चरमपंथी इलाके की जानकारी रखते हैं और इसलिए वो छिपे रहकर एकाएक आक्रमण करेंगे जैसा की पिछले हमलों में होता रहा है.

खबरों के अनुसार चरमपंथी सुरंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

लेकिन बहुत कुछ इस बात पर निर्भर रहेगा की अब सेना क्या रणनीति अपनाती है. इससे पहले वज़ीरिस्तान को लेकर सेना की रणनीति बहुत साफ़ नहीं रही है. अब ये देखना होगा की इस बार क्या होता है.

फिलहाल सेना को रास्तों और प्रमुख शहरों में डेरा मज़बूत रखना होगा. वर्तमान में महसूद दबदबे वाले लाढ़ा, मकीन और सरारोघा में सेना का जाना लगभग असंभव है

सेना का एक प्रारंभिक लक्ष्य होगा कि ऊँची जगहों पर कब्ज़ा किया जायए और वहां चौकियां बनायीं जाए और संभावना है कि सेना तालेबान नेताओं को निशाना बनाती रहेगी.

पहले के अभियानों में क्या हुआ है?

वज़ीरिस्तान में परंपरा रही है की वो बाहरी हस्तक्षेप को नहीं स्वीकारते. 1860 के दशक से ही, ब्रितानी हुकूमत वाले इलाके में वज़ीरिस्तान के कबायलियों द्वारा साहसी हमलों के बाद, ब्रितानी सैनिकों ने भी इस इलाके में बहुत ही कठिन अभियान छेड़ा था. सौ साल बाद पाकिस्तानी सेना के लिए ये काम कोई आसान नहीं है.

2004 में पाकिस्तानी सेना को वज़ीरों से जुड़े हुए चरमपंथियों की वजह से भारी नुकसान हुआ था. ये संभावना भी है की महसूद गुट के खिलाफ दक्षिण वज़ीरिस्तान में अभियान के कारण, उत्तर और दक्षिण वज़ीरिस्तान में वज़ीर कबायली इलाकों में मौजूद चरमपंथी गुट भी इस लड़ाई में शामिल हो सकते हैं. ये गुट इस वक्त अल क़ायदा से जुड़े हुए हैं और अभी अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई में शामिल है. इनके पाकिस्तानी सेना के साथ शांति समझौते हुआ है.

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