अफ़ग़ान चुनाव से जुड़े सवालों के जवाब

Image caption दूसरे दौर का मतदान सात नवंबर को होना है

अफ़ग़ानिस्तान के चुनाव आयोग ने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव में दूसरे दौर का मतदान कराया जाएगा.

अगस्त में पहले दौर के मतदान के बाद लगभग तीस प्रतिशत वोट फर्ज़ी पाए गए और कोई उम्मीदवार स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सका इसलिए दूसरे दौर का मतदान कराया जा रहा है.

चुनाव आयोग ने कहा है कि दूसरे दौर की वोटिंग सात नवंबर को होगी, वर्तमान राष्ट्रपति और अगले दौर के लिए प्रमुख उम्मीदवार हामिद करज़ई ने कहा है कि उन्हें चुनाव आयोग का फ़ैसला स्वीकार्य है.

दूसरे दौर के मतदान से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब.

अब किस-किस उम्मीदवार के बीच मुक़ाबला होगा?

मौजूदा राष्ट्रपति हामिद करज़ई का मुक़ाबला निकटतम प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला से होगा जो पहले विदेश मंत्री रह चुके हैं. अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के आरोप लगाए थे और आरोपों की जाँच के बाद उन्हें सही पाया गया है. हामिद करज़ई पहले दौर में जीत हासिल करने के लिए ज़रूरी 51 प्रतिशत वोट नहीं पा सके हैं इसलिए दोबारा मतदान हो रहा है. चुनाव आयोग के मुताबिक़ करज़ई को 49 प्रतिशत और अब्दुल्ला अब्दुल्ला को 31 प्रतिशत वोट मिले हैं. हामिद करज़ई देश के बहुसंख्यक पश्तून बिरादरी से आते हैं और जबकि डॉक्टर अब्दुल्ला अब्दुल्ला ताजिक मूल के हैं जिनका प्रभाव देश के उत्तरी भाग में अधिक है.

दूसरे दौर के मतदान में क्या चुनाव परिणाम बदल सकते हैं?

अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव पर नज़र रखने वाले जानकारों का कहना है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि अगला दौर अगस्त के चुनावों की ही तरह नहीं होगा. अगस्त के चुनाव के लिए महीनों की तैयारियाँ की गई थीं लेकिन सात नवंबर को होने वाले चुनाव के लिए कुछ ही सप्ताह का समय मिल रहा है. ज़ाहिर है, दूर-दराज के इलाकों में चुनाव कराने की व्यावहारिक समस्याएँ और सुरक्षा के मसले पहले ही जैसे रहेंगे. अमरीका, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का ज़ोर इस बात पर है कि चुनाव परिणाम को पारदर्शी और निष्पक्ष दिखना चाहिए. अफ़ग़ानिस्तान के नियमों के मुताबिक़ चुनाव का दूसरा दौर पहले दौर के परिणाम आने के दो सप्ताह के भीतर हो जाना चाहिए.

इस विवाद का अमरीका जैसे देशों की अफ़ग़ानिस्तान नीति पर क्या असर पड़ा है?

चुनाव परिणाम को लेकर पैदा हुए गतिरोध की वजह से कई बड़े निर्णय अधर में लटक गए थे. मिसाल के तौर पर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा स्पष्ट शब्दों में कह चुके हैं कि जब तक चुनाव परिणाम स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आ जाते तब तक इस बात का फ़ैसला नहीं किया जाएगा कि और अमरीकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान भेजे जाएँ या नहीं. यह विवाद ऐसे समय छिड़ा है जबकि नैटो सेना अधिकारियों का कहना है कि अगले छह से 12 महीने में इस बात का फ़ैसला होगा कि अफ़ग़ानिस्तान में जीत होगी या हार.

ये चुनावी गड़बड़ियाँ आख़िर कितनी बड़ी थीं?

धांधली और मनमानी की 2000 से अधिक शिकायतें चुनाव आयोग को मिली थीं. आयोग ने गड़बड़ी के आरोपों के बाद 600 से अधिक मतदान केंद्रों के वोटों की गिनती रोकने का आदेश दिया था. चुनाव आयोग का कहना है कि अगस्त में डाले गए तीस प्रतिशत से अधिक वोट फ़र्ज़ी थे. करज़ई को मिले 13 लाख से अधिक वोट जाली थे, अब्दुल्ला अब्दुल्ला के समर्थन में भी उत्तरी इलाक़े में काफ़ी फर्ज़ी वोटिंग हुई थी.

अफ़ग़ानिस्तान की चुनाव प्रक्रिया कैसी है?

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति का चुनाव पाँच साल के लिए होता है और कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो बार राष्ट्रपति बन सकता है. राष्ट्रपति बनने के लिए कुल मतदान के पचास प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना ज़रूरी होता है. अगर किसी व्यक्ति को पहले दौर के मतदान में पचास प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिलते हैं तो दो सप्ताह के भीतर दूसरे दौर का मतदान होता है. सिर्फ़ अफ़ग़ान नागरिक और अफ़ग़ान माता-पिता की संतानें ही राष्ट्रपति चुनाव लड़ सकती हैं. राष्ट्रपति के उम्मीदवार का मुसलमान होना ज़रूरी है और उसकी उम्र चालीस वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए.

इस बार के चुनाव में हिस्सा लेने वाले मतदाताओं के बारे में क्या जानकारियाँ हैं?

पूरे देश में तीन करोड़ रजिस्टर्ड मतदाता हैं जिनमें से एक करोड़ 70 लाख लोगों ने वोट डाला था. मतदाता की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए. ईरान और पाकिस्तान में रहने वाले अफ़ग़ान शरणार्थियों ने इस चुनाव में वोट नहीं डाला. 25 हज़ार मतदान केंद्र बनाए गए थे जो महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग थे.

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