अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव उलझा

अब्दुल्ला अब्दुल्ला
Image caption प्रमुख विरोधी अब्दुल्ला अब्दुल्ला के नाम वापस लेने के बाद स्थिति जटिल हो गई है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि वो अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति पद के चुनाव से अब्दुल्ला अब्दुल्ला के हटने के फ़ैसले का सम्मान करती हैं.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान के लोगों और उनके अगले राष्ट्रपति का समर्थन करना जारी रखेगा.

उनका कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों को संविधान के अनुसार चुनाव पूरे कर लेना चाहिए.

इससे पहले अमरीका ने कहा था कि अगर मुख्य उम्मीदवार ही नाम वापस ले ले तो मतदान की वैधता पर सवाल खड़े हो जाते हैं.

अब राष्ट्रपति पद की दौड़ में केवल हामिद करज़ई रह गए हैं. करज़ई का कहना था कि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर फ़ैसला करेगा.

विरोध में नाम वापसी

उल्लेखनीय है कि इसके पहले अफ़गानिस्तान में राष्ट्रपति पद के लिए हो रहे चुनावों के दूसरे चरण से पहले राष्ट्रपति हामिद करज़ई के विरोधी अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने अपना नाम वापस लेने की घोषणा कर दी थी.

डॉ अब्दुल्लाह ने यह कहते हुए चुनावों से नाम वापस लेने की घोषणा की कि उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की थी लेकिन वो मांग पूरी नहीं हुई है.

उनका कहना था, '' मैं इन चुनावों में हिस्सा नहीं लूंगा.''

ये पूछे जाने पर कि क्या वो अपने समर्थकों से मतदान का बहिष्कार करने की अपील करेंगे तो उनका कहना था, '' मैंने ऐसी अपील नहीं की है.''

अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने पहले दौर के चुनावों की देख रेख करने वाले अधिकारियों को बर्ख़ास्त करने की मांग की थी लेकिन राष्ट्रपति करज़ई ने यह मांग ख़ारिज कर दी थी.

राष्ट्रपति करज़ई के प्रवक्ता वहीद उमर ने कहा कि अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह का नाम वापस लिया जाना ‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’ है लेकिन चुनाव योजना के अनुरुप ही होंगे.

उनका कहना था, '' चुनाव प्रक्रिया को पूरा करना ही होगा. अफ़गानिस्तान की जनता को वोट का अधिकार देना ही होगा.''

काबुल में बीबीसी के एंड्रयू नार्थ का कहना है कि अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह के नाम वापस लिए जाने से ऐसी परिस्थिति पैदा हुई जो पहले कभी नहीं देखी गई और अभी साफ़ नहीं है कि आगे क्या होगा.

अगस्त में हुए चुनावों के पहले दौर में धांधली के आरोप लगे थे जिसके बाद दूसरे दौर की घोषणा हुई थी.

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