पाक सरकार अध्यादेश से पीछे हटी

यूसुफ़ रज़ा गिलानी
Image caption पाकिस्तान सरकार ने विरोध के बाद विवादास्पद अध्यादेश न लाने का फ़ैसला किया

पाकिस्तान के सत्तारूढ़ दल पीपुल्स पार्टी से विवादास्पद अध्यादेश नेशनल रिक्सीलिएशन ऑर्डिनेंस यानी एनआरओ को संसद में पेश न करने का फ़ैसला लिया है.

पिछलों दिनों विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ दलों ने भी इस का भारी विरोध किया था जिसे पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार को काफ़ी ख़तरा हो गया था.

प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने मंगलवार को संसद में बात करते हुए इस अध्यादेश के बारे में फ़ैसला अदालतों पर छोड़ा है.

विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के भारी विरोध के बाद प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने संसद में अपने भाषण में विवादास्पद अध्यादेश को संसद में पेश न करने की घोषणा की.

उन्होंने संसद में बोलते हुए कहा, '' मेरी सरकार ऐसे विवादास्पद नियमों को हाथ नहीं लगाएगी जिससे संस्थाओं को नुक़सान पहुँचे और सभी संस्थाओं को सुरक्षित बनाना मेरी सरकार का कर्तव्य है.''

उन्होंने आगे कहा,'' अगर इस अध्यादेश पर सर्वसम्मति नहीं बनती तो इसको आन का मसला नहीं बनाया जाएगा.''

ग़ौरतलब है कि इस अध्यादेश पर पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने 2007 में हस्ताक्षर किए थे.

इस अध्यादेश से उन लोगों को राहत मिली जिनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार और अन्य मामले दर्ज थे और बेनज़ीर भुट्टो की स्वदेश वापसी भी इसी के कारण हुई थी.

विवादास्पद क़ानून

अब पीपुल्स पार्टी की सरकार इसको संसद से पारित करवा कर क़ानून बनाना चाहती है.

संसद से पारित होने के बाद इस क़ानून से जिन लोगों को लाभ होगा उनमें राष्ट्रपति आसिफ ज़रदारी, गृह मंत्री रहमान मलिक और कई दूसरे वरिष्ठ नेता शामिल हैं.

सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट ने भी इस अध्यादेश का भारी विरोध किया था. लेकिन जब सरकार ने इसे संसद से पारित न करने का फ़ैसला लिया तो एमक्यूएम ने इसका स्वागत किया.

प्रधानमंत्री ने उन राजनीतिक पार्टियों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस अध्यादेश को संसद से पारित न करवाने की सलाह दी थी.

उन्होंने ने साथ ही यह भी कहा कि उनकी सरकार संविधान के 17वें संशोधन को भी ख़त्म करेगी जिसके बाद राष्ट्रपति को संसद को भंग करने का अधिकार ख़त्म हो जाए गा.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन और संसद के अधिकारों को भी संतुलन में लाया जाएगा.

प्रधानमंत्री के भाषण के बाद जिन पार्टियों ने इस अध्यादेश का विरोध किया था, उन्होंने पीपुल्स पार्टी की सरकार को धन्यवाद दिया.

विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता चौधरी निसार अली ख़ान ने कहा कि उन्हें आशा है कि सरकार लोकतंत्र को मज़बूत करने संबंधी दस्तावेज़ पर अमल करेगी जिस पर बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ ने दस्तख़त किए थे.

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