पाक का अमरीका से अनुरोध

  • 14 नवंबर 2009
यूसुफ़ रज़ा गिलानी
Image caption पाकिस्तान का कहना है कि भारत के साथ तनाव कम होने से वह अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा

पाकिस्तान ने अमरीका से आग्रह किया है कि वह पाकिस्तान और भारत के बीच बातचीत की प्रक्रिया फिर से शुरु करवाने में भूमिका अदा करे.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने शु्क्रवार को अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेम्स जोन्स से यह अनुरोध किया है.

उन्होंने कहा है कि यदि भारत के साथ पाकिस्तान का तनाव ख़त्म होगा तो वह अपना ध्यान अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे इलाक़े में चरमपंथियों से निपटने में केंद्रित कर सकेगा.

याद रहे कि पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत को स्थगित कर दिया था.

मुंबई पुलिस का कहना है कि इन हमलों में शामिल लोग पाकिस्तान के नागरिक थे. हमलों में शामिल चरमपंथियों में से एकमात्र जीवित अजमल कसाब ने स्वीकार किया है कि वह पाकिस्तान का निवासी है.

भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान मुंबई हमलों के लिए दोषी लोगों पर कार्रवाई नहीं करता, वह शांति प्रक्रिया फिर से शुरु नहीं करेगा.

अनुरोध

अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाक़ात के दौरान विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख़्तियार और अन्य अधिकारियों ने भाग लिया.

अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पाकिस्तान की यात्रा पर थे और उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी, सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक़ परवेज़ कियानी और वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाक़ात की.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यूसुफ रज़ा गिलानी ने अमरीकी अधिकारी से मुलाक़ात के बाद कहा, “इन दिनों पाकिस्तान और भारत के बीच संबंध पहले की तुलना में बेहतर नहीं हैं और इसके लिए दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया फिर से शुरु होनी चाहिए.”

उन्होंने कहा है, “यह अनिवार्य है कि अमरीका भारत के साथ पाकिस्तान के मुद्दों को गंभीरता से ले जिसमें कश्मीर, पानी का मसला, भारतीय सेना की बढ़ती हुई क्षमता और दक्षिण एशिया में शक्ति का संतुलन बनाए रखना शामिल है.”

प्रधानमंत्री ने कहा है, “अमरीका पाकिस्तान और भारत के बीच शांति प्रक्रिया फिर से शुरु करवाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे.”

उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कोई तनाव नहीं होगा तो उनकी सेना देश के क़बायली इलाक़ों में चरमपंथियों के ख़िलाफ अपना ध्यान केंद्रित करेगी.

प्रधानमंत्री ने अमरीकी अधिकारी से कहा है कि उनका देश क़बायली इलाक़ों से चरमपंथ और आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंक देगा लेकिन भारत के साथ कुछ तनाव के कारण सेना का ध्यान पश्चिमी सीमा पर है.

अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेम्स जोन्स ने प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया कि ओबामा प्रशासन दक्षिण एशिया की सुरक्षा और शांति के लिए अपनी बहतर भूमिका अदा करेगा.

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