जारी हैं जिहादी गुटों के प्रकाशन

Image caption पाकिस्तान में कई प्रतिबंधित गुटों के प्रकाशन बाज़ार में बिकते हैं

पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठनों के कई प्रकाशन पांबदी के बावजूद आसानी से उपलब्ध हैं और जिहाद का संदेश पहुँचा रहे हैं.

पाकिस्तान के करीब हर शहर में प्रतिबंधित संगठन लशकरे तैबा, जमात-उल-दावा और जैशे मोहम्मद सहेत कई गुटों के समाचार पत्र प्रतिबंध के बावजूद आसानी से मिलते हैं.

जिन प्रकाशनों पर सरकार ने पाबंदी लगाई है उन्होंने नए नामों से अपने समाचार पत्र प्रकाशित करने शुरु कर दिए है. इन प्रकाशनों में अल-हरमैन, अल-सफ्फात, अख़बारे तालबा, ज़रबे मोमिन और ज़रार शामिल हैं.

जिन पर प्रतिबंध नहीं है उसमें जिहादी सामग्री और भारत विरोधी लेख हैं.

पहले यह पुराने नामों से प्रकाशित किए जाते थे लेकिन अब नए नामों से बाज़ार में मिल रहे हैं. इन समाचार पत्रों में लोगों को जिहाद के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और भारत विरोधी भावनाओं को भी भड़काया जाता है.

इंटरनेट का सहारा

एक समाचार पत्र में ख़बर है कि पाकिस्तान में हाल के दिनों में जो आतंकवादी घटनाएं हो रही हैं उनमें भारतीय ख़ुफिया एजेंसी रॉ लिप्त है. आगे कहा गया है कि पिछले एक दशक में रॉ के 35 हज़ार एजेंटों ने पाकिस्तान में प्रवेश किया.

जाने माने विश्लेषक प्रोफीसर हसन असकरी ने इन जिहादी प्रकाशनों के बारे में बताया, “दो प्रकार के जिहादी प्रकाशन बाज़ार में मिलते हैं, एक वह हैं जिस पर पाबंदी नहीं है. बुनयादी तौर पर वह किसी जिहादी गुट की नहीं है बल्कि उनके समर्थकों के हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “जिन संगठनों पर प्रतिबंध है, उसके प्रकाशन बाज़ार में मिल जाते हैं. वह गुट ख़ामोशी से छपवा के वितरण करते हैं और अपना संदेश पहुँचाते हैं.”

प्रतिबंधित संगठनों ने जिहाद के संदेश को फैलाने के लिए इंटरनेट का भी सहारा लिया हुआ है.

जैशे मोहम्मद की बेवसाइट रंगोनूर डॉट कॉम (www.rangonoor.com) पर अगर आप जाएँगे तो वहाँ आप को जिहाद से संबंधित बहुत सी सामग्री मिलेगी और मौलाना मसूद अज़हर के भाषण भी उपलब्ध हैं, जिसे आप सुन भी सकते हैं.

इस बेवसाइट पर जिहादी पुस्तकें भी हैं जिसे आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है.

ध्यान रहे कि मुंबई हमलों के बाद सरकार ने जिहादी गुटों की वेबसाइटों को बंद कर दिया था लेकिन यह प्रतिबंध कुछ देर ही चल पाया.

जिहादी गुटों की कई वेबसइट आज भी आप देख सकते हैं और अधिकतर वेबसाइट उर्दू भाषा में हैं.

प्रतिबंधित प्रकाशनों के बारे में सरकार की प्रतिक्रया जानने की कोशिश की लेकिन किसी अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका.

गृह मंत्री रहमान मलिक ने कई बार कहा है कि जिहादी प्रकाशनों और उनकी वेबसाइटों को बंद कर दिया गया है.

उनके यह दावे अपनी जगह हैं लेकिन यह सच है कि जिहादी गुट अपना संदेश पहुँचाने के लिए सभी साधनों का इस्तेमाल करते हैं और वह अकसर कामयाब भी होते हैं.

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