श्रीलंका में नए नोट पर विवाद

महेंदा राजपक्षे
Image caption विपक्ष ने आरोप लगाया है कि निकट भविष्य में चुनाव होने की संभावना है और इसीलिए राजपक्षे ऐसी गतिविधियाँ कर रहे हैं

श्रीलंका में वहाँ के केंद्रीय बैंक की ओर से जारी किए गए एक हज़ार रुपए के नए नोट पर विवाद खड़ा हो गया है.

बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड के अनुसार विवाद इस मुद्दे पर केंद्रित है कि ये नोट लगभग छह महीने पहले तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई की पराजय दर्शाते हैं.

श्रीलंका में विपक्ष के एक नेता मंगला समारावीरा ने इसे 'शर्मनाक कृत्य' की संज्ञा दी है जबकि केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने सभी आरोपों को ख़ारिज किया है और सरकार का बचाव किया है.

विवादास्पद नोट

इन विवादास्पद नोटों में एक तरफ़ श्रीलंकाई सेना की ओर से देश का झंडा फ़हराने की तस्वीर है. सेना को उसी मुद्र में दिखाया गया है जिस तरह से उसे एलटीटीई पर विजय से ठीक पहले दिखाया गया था.

विवाद दरअस्ल नोटों की दूसरी तरफ़ छपी तस्वीर पर है. नोट के दूसरी तरफ़ हाथ उठाकर विजयी मुद्रा में मुस्कुराते हुए राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की तस्वीर है.

श्रीलंका के केंद्रीय बैंक ने एक बयान में इसके बारे में कहा - "यह राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नेतृत्व में तरक्की और समृद्धि के ओर अग्रसर एकजुट राष्ट्र का प्रतीक है.

लेकिन एक प्रमुख विपक्षी नेता मंगला समारावीरा ने इस पर नाराज़गी जताई और जल्द संभावित राष्ट्रपति पद के चुनावों की ओर ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने इसे 'शर्मनाक काम' भी कहा है.

अपनी दलील में मगला समारावीरा ने कहा, "ऐसा कम ही होता है जब किसी जीवित नेता की तस्वीर नोट पर छपे."

लेकिन केंद्रीय बैंक के गवर्नर अजित कब्राल ने इन आरोपों को विपक्ष की ईर्ष्या बताते हुए ख़ारिज कर दिया है.

उन्होंने कहा है, "ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की तस्वीरें भी उनके कार्यकाल के दौरान ही नोट पर छपीं और दो अन्य राष्ट्रपतियों की तस्वीरें भी सिक्कों पर उनके जीवित रहते हुए छपी थीं, इसलिए यह कोई नई बात नहीं है."

वैसे एलटीटीई को लड़ाई में छह महीने पहले हराने के बाद भी आज श्रीलंका में कई जगहों पर पोस्टर लगे हुए हैं जिनमें राष्ट्रपति राजपक्षे और उनके भाइयों को लड़ाई में जीत का श्रेय देते हुए नारे लिखे हुए हैं.

एक हफ़्ता पहले श्रीलंका के सेना प्रमुख जनरल सरत फ़ॉन्सेका ने इस्तीफ़ा दे दिया था और स्पष्ट तौर पर वे मानते हैं कि उन्हें जीत का उचित श्रेय नहीं मिला है.

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