सिंधु नदी का डेल्टा ख़तरे में

भारत प्रशासित कशमीर से अपनी यात्रा शुरु करने वाली सिंधु नदी सागर तक पहुँचने में तीन हज़ार एक सौ अस्सी किलोमीटर का फासला तय करती है. लेकिन इसके डेल्टा में नदी का पानी वर्षों से नहीं पहुँचा.

सिंधु नदी का डेल्टा केटी बंदर में स्थित है जो कराची से करीब दो सौ किलोमीटर की दूरी पर है. जलवायु परिवर्तन के कारण विश्व के इस सातवें बड़े डेल्टा पर तेज़ी से सागर का पानी भर रहा है.

सिंध में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए काम करने वाली ग़ैरसरकारी संस्थाओं का कहना है कि समुद्र प्रतिदिन 80 एकड़ कृषि ज़मीन पर प्रभाव डाल रहा है और लोग विस्थापित हो रहे हैं.

केटी बंदर पाकिस्तान के सबसे बड़े इंडस डेल्टा के तालुक़ा का नाम है जो तेज़ी से समुद्र के नमकीन पानी के हवाले हो रहा है.

स्थानीय लोगों के अनुसार सिंधु नदी का पानी न होने की वजह से समुद्र आगे बढ़ रहा है और उनकी वह कृषि ज़मीन पानी के नीचे आ गई है जहाँ वे धान की फसल बोया करते थे.

विस्थापित हो रहे हैं लोग

गुलाब शाह की उम्र 35 साल है और वे केटी बंदर के विस्थापितों में से एक हैं. उनका कहना है कि जब वे केटी बंदर को दोबारा देखने जाते हैं तो उनका दिल दुखता है.

वो ज़मीन जहाँ हरी भरी फसले तहराती थीं वहाँ आज समुद्र का पानी मौजूद है और ऐसा दृश्य देखना वे पसंद नहीं करते.

पाकिस्तान सरकार ने इंडस डेल्टा की सुरक्षा के लिए संसद में स्थाई समिति गठित की हैं. कुछ सांसद इलाक़े का दौरा भी कर चुके हैं और प्रस्ताव भी तैयार किए हैं लेकिन बात प्रस्ताव तैयार करने तक ही सीमित रही है.

पर्यावरण सुरक्षा के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था डब्ल्यूडब्ल्लूयएफ़ के अनुसार समुद्र प्रतिदिन 80 एकड़ कृषि की ज़मीन अपने असर में ले रहा है और तेज़ी के साथ आगे बढ़ रहा है.

डब्ल्यूडब्ल्लूयएफ़ के साइट मैनेजर ज़ाहिद जलबाणी ने बीबीसी को बताया, “केटी बंदर पर जलवायु परिवर्तन का बरा प्रभाव पड़ रहा है.”

उन्होंने आगे कहा, “यह पता नहीं है कि कितनी संख्या में लोग इलाक़ा छोड़ कर जा चुके हैं लेकिन पर्यावरण पर जो असर हुआ है उसमें प्रतिदिन कृषि की ज़मीन समुद्र की ज़द में आ रही है, ग़रीबी में बढ़ोतरी हो रही है और लोगों के मवेशी मर रहे हैं.”

सरकार और ग़ैर सरकारी संस्थाओं की ओर से जारी रिपोर्टों के मुताबिक़ ज़िला ठटा के दो तालुक़ा केटी बंदर और समारो जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हुए हैं. राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार दोनों तालुक़ा के अधिकतर इलाक़ों में नमकीन पानी है जो समुद्र से आया है.

केटी बंदर के विस्थापितों में शफी मरगर भी शामिल हैं. उन्होंने कहा, “केटी बंदर में हज़ारों एकड़ ज़मीन मेरे पूर्वजों की थी जो समुद्र की नज़र हो गई और मैं वहाँ से दूसरे तालुक़ा समारो गया लेकिन समुद्र के पानी ने वहाँ भी मेरा पीछा नहीं छोड़ा.”

विषेशज्ञों का मानना है कि इंडस डेल्टा तक सिंधु नदी का पानी ज़रूर पहुँचना चाहिए क्योंकि यह पर्यावरण के लिए उचित है.

सिंध सरकार के एक अधिकारी मंज़ूर अहमद शेख़ ने माना है कि पानी की कमी इंडस डेल्टा की तबाही की सबसे बड़ी वजह है. यह इतना बड़ा मुद्दा है कि केवल सिंध सरकार अकेले इस की सुरक्षा नहीं कर सकती.

उन्होंने कहा कि सिंध सरकार की कई सालों से मांग है कि इंडस डेल्टा में पानी छोड़ा जाए. प्रतिदिन 10 हज़ार क्यूसिक पानी इंडस डेलटा में जाना चाहिए.

विषेशज्ञों का कहना है कि केटी बंदर में इंडस डेल्टा की सुरक्षा के लिए सकारी स्तर पर काम शुरु न किया गया तो समुद्र अपना रुख़ बड़े शहरों की ओर कर सकता है और बाद में समुद्र को रोकना मुश्किल हो जाएगा.